भोपाल से मोहम्मद साजिद खान की रिपोर्ट
भोपाल । सूचना अधिकार अधिनियम 2005में मांगी गई जानकारियों को पुलिस विभाग द्वारा गोपनीय और धारा 8 का हवाला देकर हमेशा देने से इनकार किया जाता है और आवेदक मजबूर होकर खामोश हो जाता है । परन्तु अब पुलिस की बहानेबाजी नही चलेगी । मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग के सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने एक बहु प्रतिष्टित आदेश पारित किया जिसके दूरगामी परिणाम जनता के लिए लाभकारी होँगे ।
एक मामले में आदेश पारित करते हुऐ सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने रीवा DIG से सीधी के पत्रकार के ऊपर कथित झूठे मामले पर पुलिस की जांच रिपोर्ट तलब की ।
पुलिस ने कहा धारा 8 1 H (ज) के तहत जानकारी सामने आने से अभियोजन ही सकता है प्रभावित।
गौरतलब हो कि वर्ष 2015 में सीधी के एक पत्रकार संजय कुमार रायकवार के ख़िलाफ़ 384 का केस दर्ज हुआ था । केस दर्ज़ होने के बाद पीड़ित पत्रकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायत की । शिकायत पर उच्च अधिकारियों द्वारा जांच की गई । जिसकी जानकारी देने से पुलिस ने इंकार किया ।
पत्रकार का आरोप कि उसके द्वारा भ्रष्टाचार उज़ागर करने पर अधिकारी और पुलिस की मिलीभगत से उस पर झूठा मुकदमा दर्ज़ किया गया । बाद में जांच रिपोर्ट दबा दी गयी और चालान कोर्ट में पेश कर दिया गया। पुलिस ने धारा 8 का हवाला देकर यह कहते हुऐ जाँच कारवाई की जानकारी पीड़ित पत्रकार को देने से इंकार किया था कि अभियोजन प्रभावित होने की आशंका है ।
पुलिस के तर्क को नकारते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि “अभियोजन प्रभावित होगा कहने मात्र से जानकारी नहीं छुपाई जा सकती है पुलिस को साबित करना होगा की जानकारी सामने आने से अभियोजन किस तरह से प्रभावित हो सकता है।”
सूचना आयुक्त ने अपने फैसले में ये भी कहा कि अगर इस प्रकरण में जांच पूरी हो चुकी है और किसी दोषी व्यक्ति की गिरफ़्तारी या उसके ख़िलाफ़ कोई मुकदमा दर्ज़ होना बाकी ना रहा हो तो जानकारी को छुपाया नहीं जा सकता है।
पुलिस से जांच रिपोर्ट तलब करते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने पुलिस को कहा कि “इस प्रकरण मैं जो तथ्य रिकॉर्ड पर हैं वो अगर सच है तो उन्हें न्याय हित मे सामने लाना चाहिए। वही धारा 8 1 h जांच की प्रक्रिया से संबंधित है पर न्यायालय में विचाराधीन मामले में पुलिस को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। मात्र धारा का उल्लेख करने से जानकारी नही छुपाई जा सकती।”
