उपराष्ट्रपति ने कहा मानवाधिकारों की रक्षा और मानवीय गरिमा को बरकरार रखने के लिये प्रत्येक व्यक्ति को खुद अपने भीतर झांक कर आत्मावलोकन करना होगा।
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि नागरिक अधिकारों की रक्षा तभी हो सकती है जब प्रत्येक व्यक्ति दूसरों के अधिकारों का सम्मान करे. नायडू ने आर पी ढोकलिया के भाषणों और लेखों के संग्रह पर आधारित पुस्तक ‘ह्यूमन राइट्स, वेल्यूज और कल्चरल इथोस’ का विमोचन करते हुये कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और मानवीय गरिमा को बरकरार रखने के लिये प्रत्येक व्यक्ति को खुद अपने भीतर झांक कर आत्मावलोकन करना होगा।
वेंकैया नायडू ने कहा कि हमें सांस्कृतिक लोकाचार के संरक्षण और संवर्धन करने की जरूरत है. इस लक्ष्य को महज शिक्षा से ही नहीं बल्कि मीडिया और समाज के सभी वर्गों का नेतृत्व करने वाले नेताओं के आदर्श लोकाचार से हासिल करना संभव होगा.
इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी और शिक्षाविद जे एस राजपूत भी मौजूद थे. नायडू ने कहा कि देश के सभी नागरिकों को दूसरों के अधिकारों का संरक्षक बनना होगा. यह प्रत्येक नागरिक का मूल दायित्व है.।