टाइगर यानि मुख्यमंत्री की उम्मीदों पर खरा उतरे प्रशासन
– किशोर सागर तालाब को कब्ज़ामुक्त करने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
– अदालत के सम्मान का सवाल और सरकार की बेशकीमती जमीन बचाने की चुनौती
(छतरपुर मप्र / 10 मार्च 21/बुधवार)
छतरपुर शहर के किशोर सागर तालाब से अदालत के आदेश के बाद भी कब्जे नहीं हटाना मुख्यमंत्री यानि टाइगर की उम्मीदों का शिकार है। मुख्यमंत्री का उदघोष है की भू माफियाओ को नष्ट करो पर किशोर सागर तालाब के कब्जे के मामले में प्रशासन की नतमस्तक अवस्था में दिखाई दे रहा है । छतरपुर शहर तालाब संघर्ष समिति और जागरूक लोगो ने संयुक्त रूप से बुधवार को एसडीएम संतोष सिंह चंदेल को ज्ञापन सौंपा। जिसकी प्रति मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव राजस्व और कलेक्टर शिलेन्द्र सिंह को भी प्रेषित की गई है । ज्ञापन में तालाब के कब्जेधारियों द्वारा परोसे जा रहे काले सच को उजागर कर प्रामाणिक दस्तावेज भी संलग्न किये गये है। एसडीएम ने आश्वासत किया है की शीघ्र ही उचित कार्यवाही होंगी।
छतरपुर शहर के किशोर सागर तालाब की कब्जे में कैद लहरों को रिहा करवाने के लिये आमजनता कई वर्षो से संघर्षरत है। एनजीटी के आदेश के बाद भी प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं करने से अदालत की घोर अवमानना हो रही है वहीँ मप्र शासन की बेशकीमती भूमि भी कब्ज़ामुक्त नहीं हो पा रही है । बुधवार को तालाब संघर्ष समिति और शहर के जागरूको ने एसडीएम चंदेल को ज्ञापन सौंप तालाब को कब्ज़ामुक्त कर अदालत के आदेश के सम्मान को बचाने की मांग की है । ज्ञापन में उल्लेखित किया गया है कि मप्र शासन राजस्व विभाग के पत्र क्रमांक 5189/8510/2020/सात-एक भोपाल दिनांक 30/12/2020 के संदर्भ में कार्यालय कलेक्टर भू-अभिलेख जिला छतरपुर ने पत्र क्रमांक 142/भू-अभिलेख/स.अं.भू-अभि/2020 दिनांक 22/1/2021 के माध्यम से तहसीलदार छतरपुर को आदेशित किया था कि किशोर सागर तालाब से अतिक्रमण हटाने के एनजीटी और हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अदालत की अवमानना करने पर आवश्यक कार्यवाही करते हुये कार्यालय को एक सप्ताह में अवगत कराया जाये। इसके बाद भी कार्यवाही शून्य है । ज्ञापन में लेख किया गया है कि शहर से निकलने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्गो के बीच किशोर सागर तालाब स्थित है। जिसका सरकारी भूअभिलेखो में खसरा नंबर 3087 में रकवा 8.2 एकड दर्ज है। भूअभिलेख के 1939-40 के दस्तावेजो के अनुसार खसरा में हल्कुआ बेलदार खसरा बंदोबस्त के कांलम (खाना) 12 में कब्जेधारी की हैसियत से दर्ज है और खाना 14 में मालिक के कालम में सरकार लेख है। विवरण देखे तो खसरा में खसरा क्रमांक 3116 में मेढ, 3117 में कर्मटा, 3121 में बहमदेव मंदिर, 3124 में सडक और 3054 में मेढ तालाब दर्ज है इन सभी पर हल्कुआ बेलदार कब्जेधारी की हैसियत से नामाकिंत है। इस खसरा के अनुसार किशोर सागर तालाब का पूरा आसपास का रकवा भी सरकारी दर्ज है। हल्कुआ बेलदार के पुत्र गोरा बेलदार का नाम फर्जी रूप से बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश से कुछ खसरा नंबर सरकारी रिकार्ड में षडयंत्र और साजिश कर दर्ज कर दिया गया जिसके प्रमाण सरकारी रिकार्ड की फाईलो में है। इसी फर्जी नामांतरण के आधार पर किशोर सागर तालाब पर कब्जा करने का सुनियोजित साजिश को अंजाम दिया गया जिस कारण आज इस तालाब पर अनाधिकृत कब्जा कर भवन निर्माण हो गये है। जबकि पूरी रजिस्ट्रीया शून्य घोषित हो जाना चाहिये । किशोर सागर तालाब के अनाधिकृत कब्जे को बेदखल करने के लिये सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी बीएल मिश्रा ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण ( एनजीटी ) में याचिका दायर की। याचिका क्रमांक ए 316/2014 में माननीय न्यायालय ने 17 सितंबर 2014 को आदेश पारित किया कि तालाब के मूल रकवे, भराव क्षेत्र (केचमेंट) और 10 मीटर ग्रीन जोन से सभी कब्जे हटाये जाये। तभी से कब्जेधारियो को हटाने की विधिवत और आदेश के मूल परिपालन में कार्यवाही नही होने से अदालत की अवमानना हो रही है। ज्ञापन में हवाला दिया है कि कार्यालय कलेक्टर के पत्र क्रमांक 160/री0कले0/2011 दिनांक 01.06.2011 के आदेश पर किशोर सागर तालाब का सीमांकन कर इसका प्रतिवेदन कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी छतरपुर ने पत्र क्रमांक 210/अ0वि0अ0/जांच/2011 दिनांक 14/06/2011 के जरिये कलेक्टर कार्यालय को प्रस्तुत किया था। एसडीएम केपी महेश्वरी, भूअभिलेख अधिकारी आरबी वर्मा और नायब तहसीलदार राकेश शुक्ला की संयुक्त टीम द्धारा जांच में तालाब के सभी बिन्दूबार कब्जेधारियो का हवाला दिया गया है। किशोर तालाब के रकवे पर निर्मित शहनाई गार्डन पूरी तरह से किशोर सागर तालाब के भूमि पर निर्मित है इसके प्रमाण के रूप में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी छतरपुर के राजस्व प्रकरण क्रमांक 1195/अ-2/99-2000 में दिनांक 9/4/2003 का आदेश है। इस आदेश के अनुसार रघुवीरशरण लाल निगम तनय हरशरण लाल निगम निवासी छतरपुर द्धारा मौजा छतरपुर आ0ख0नं0 3117, 3116, 3113, 3114, 3115 कुल किता 5 एकत्र रकवा 0.219 आरे भूमि रिहायशी प्रयोजन के उद्वेश्य से बरातघर बनाये हेतु भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 के अन्र्तगत आवेदन पत्र, नकलखसरा, साइट प्लान अधीक्षक भू-परिवर्तन छतरपुर को प्रस्तुत किया गया था। इस प्रकरण में सहायक संचालक नगर एंव ग्राम निवेश, कार्यपालन यंत्री लोकनिर्माण, लोक स्वा. यात्रिकीय छतरपुर, तहसीलदार, छतरपुर मुख्य नगरपलिका अधिकारी से अभिमत मांगा गया। सहायक संचालक नगर निवेश एंव ग्राम निवेश द्धारा प्रतिवेदित किया गया कि ख0नं0 3113, 3114, 3115, 3116 एंव 3117 का क्षेत्र किशोर सागर तालाब की सीमा के अंतर्गत आता है। अन्य विभागो से कोई अभिमत प्राप्त नही हुआ। यह आदेश साफ तौर पर दर्शाता है कि शहनाई गाईन का रकवा पूरी तरह से किशोर सागर तालाब की सीमा मे है। साथ ही अन्य विभागो से निर्माण पूर्व कोई आवश्यक व बैधानिक अनुमतियां नही ली गई। ज्ञापन में कैचमेंट एरिया को परिभाषित करने वाले प्रामाणिक दस्तावेज, और क्षतिग्रस्त ओने को भी स्पष्ट किया गया है । महत्वपूर्ण कि किसी भी भवन मालिक के पास पर्यावरण विभाग की अनुमति नहीं है. । ज्ञापन में मांग की गई है कि संलग्न दस्तावेज और राजस्व रिकार्ड के प्रमाणित लेखो के आधार पर एनजीटी व उच्च न्यायालय के आदेश की गरिमा को देखते हुये किशोर सागर तालाब के मूल रकवे, उसके भराव क्षेत्र और 10 मीटर के ग्रीन जोन से तत्काल कब्जे हटाये जाये। क्योकि अगर छतरपुर प्रशासन इस तरह की कार्यवाही से किसी भी अनैतिक दबाब के कारण अदालत के आदेशो की अवहेलना करता है तो ऐसे अधिकारी अदालत की अवमानना के दायरे में आते है।
MP//छतरपुर :- धीरज चतुर्वेदी/ खेमराज चौरसिया(आर टी आई कार्यकर्ता )@9893998100
