भोपाल । मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि एवं मानव अधिकार विभाग के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राजेन्द्र बब्बर ने मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा प्रॉपर्टी गाइड लाइन दर में 20 प्रतिशत की कमी का स्वागत करते हुऐ कहा कि इससे आम आदमी को फायदा होगा। म प्र विधि एवं मानव अधिकार विभाग ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुऐ इसे जनता के हित मे अच्छा निर्णय निरूपित किया ।
क्या है मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार का निर्णय
राज्य सरकार ने तमिलनाडु की तर्ज पर प्रदेश के रियल एस्टेट में निवेश करने वालों को तो राहत दी है, मगर उसके उलट स्टाम्प ड्यूटी में बढ़ोतरी कर दी है। एक तरफ जहां शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कलेक्टर गाइड लाइन 20 प्रतिशत घटा दी है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर स्टाम्प ड्यूटी 7. 3 प्रतिशत के स्थान पर 9.5 प्रतिशत लगेगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में 10.3 प्रतिशत के स्थान पर 12.5 प्रतिशत वसूली जाएगी। यदि कलेक्टर गाइड लाइन से अधिक दर पर जमीन खरीदी जाती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में 2.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 5.1 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी ली जाएगी। इस आशय का निर्णय बुधवार को कमलनाथ सरकार ने कैबिनेट में लिया है।
संपत्ति में पुत्री या पत्नी को शामिल करने पर 1100 रुपए
वर्तमान में अचल संपत्ति में पत्नी तथा पुत्री को सह स्वामी के रूप में शामिल किए जाने पर स्टाम्प ड्यूटी शुल्क तथा पंजीयन फीस एक प्रतिशत तथा 0.8 प्रतिशत लगती थी, जिसे घटाकर अब स्टाम्प शुल्क का एक हजार रुपए और पंजीयन के रूप में 100 रुपए वसूले जाएंगे। यानी 1100 रुपए खर्च होने पर संपत्ति में पत्नी या पुत्री की हिस्सेदारी हो सकती है।
बंटवारे पर स्टाम्प ड्यूटी 2 प्रतिशत घटाई
पारिवारिक विभाजन में स्टाम्प शुल्क की वर्तमान दर 2.5 प्रतिशत है, जिसे घटाकर 0.5 प्रतिशत किया जाएगा। साथ ही परिवार के मध्यम चल संपत्ति के दान पर वर्तमान में 2.5 प्रतिशत स्ठाम्प शुल्क तथा पंजीयन शुल्क 0.8 प्रतिशत लगता है। अब इसे घटाकर 500 रुपए अधिकतम सीमा के साथ एक प्रतिशत तथा 100 रुपए पंजीयन शुल्क लिया जाएगा।
प्लॉट का क्राइटेरिया भी बदला
नगरीय क्षेत्र में कृषि भूमि के मामले में एक हजार वर्गमीटर तक प्लॉट के मान से तथा शेष भूमि कृषि अनुसार दरों पर मूल्यांकन के प्रावधान में बदलाव किया गया है। अब 400 वर्गमीटर तक प्लाट के माने से, अगले 300 वर्गमीटर के लिए प्लाट के 80 प्रतिशत दर तथा 300 वर्गमीटर पर 60 प्रतिशत दर के हिसाब से मूल्यांकन का प्रावधान रखा गया है।
वर्षों पुराने मकानों को भी छूट
पुराने बने मकानों में अवक्षयण के लिए अधिक राहत देते हुए अब यह व्यवस्था की गई है कि दस से बीस वर्ष पुराने भवन के लिए 10 प्रतिशत तथा इसके आगे प्रत्येक 5 वर्ष के लिए 5 प्रतिशत अधिकतम 50 प्रतिशत की सीमा में रहते हुए मूल्य में छूट दी जाएगी, जबकि पूर्व में यह छूट बीस से 50 साल पुराने मकानों के लिए 10 प्रतिशत तथा 50 साल पुराने मकानों के लिए 20 प्रतिशत थी।
24 से 30 प्रतिशत तक होगी राजस्व में वृद्धि
वाणिज्यिक कर मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि तमिलनाडु सरकार द्वारा कलेक्टर गाइड लाइन में कमी करने और स्टाम्प शुल्क तथा पंजीयन की दरें कम करने की वजह से वहां की सरकार को वर्ष 2017-18 में 30 प्रतिशत तथा वर्ष 2018-19 में के राजस्व में 24 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इससे मप्र में भी रियल एस्टेट के क्षेत्र में रजिस्ट्री बढेÞगी और सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी।
