छतरपुर से खेमराज चौरसिया की रिपोर्ट
छतरपुर। 13 साल की मासूम के साथ सामूहिक दुराचार करने के एक मामले में कोर्ट ने फैसला दिया है। विशेष न्यायाधीश नोरिन निगम की कोर्ट ने मामले के दो आरोपियो को उम्रकैद के साथ दस हजार के जुर्माना की सजा सुनाई है।
एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि 13 वर्षीय पीड़िता के पिता ने खजुराहो थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 19 सितंबर 2016 को उसकी पुत्री अपनी मां के साथ खेत पर गई थी। दोपहर में उसकी पत्नी भैसे चरा रही थी। खेत में जानवर घुस जाने से उसकी पुत्री जानवरो को भगाने गई थी जो वापिस नही आई। ढूढ़ने पर भी उसका कोई पता नही चला। पुलिस ने गुमइंसान सूचना दर्ज कर खोजबीन शुरु कर दी। पुलिस ने पीड़िता को दस्तयाब किया, पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जब पह जानवरो को भगाते समय रोड पर पहुंची तभी गोरा तरफ से मोटरसाइकिल से राजनगर का मुकेश यादव और बुद्धू साहू शराब के नशे में मिले। गाड़ी रोककर बुद्धू ने उसका दुपट्टा खीचा और मुकेश के कहने पर बुद्धू ने उसे जबरन गाड़ी में बीच में बैठाया। पीड़िता चिल्लाई तो बुद्धू ने उसके गाल में चाटा मारा और जान से मारने की धमकी दी। वह डर के कारण चुप हो गई। दोनो आरोपी उसे खजुराहो होते हुए राजनगर चमरौला मोहल्ले के आंगे एक खेत पर ले गए। मुकेश और बुद्धू ने जबरन उसके साथ दुराचार किया। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर खेत के आस पास के लोग दौड़े। तब दोनो आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। पुलिस ने मुकेश यादव और बुद्धू साहू निवासी फौजदार मोहल्ला राजनगर को गिरफ्तार कर मामला कोर्ट में पेश किया।
न्यायाधीश नोरिग निगम की कोर्ट ने सुनाई सजा
अभियोजन की ओर से डीपीओ एसके चतुर्वेदी ने पैरवी करते हुए मामले के सबूत कोर्ट के सामने रखे। विशेष न्यायाधीश नोरिन निगम की कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ऐसे मामलो में अदालतो का यह दायित्व है कि वें समाज की पुकार को सुनते हुए न्याय की भावना के अनुरुप दोषी व्यक्ति को उचित सजा दें। क्योंकि सजा से अपराधी के प्रति समाज की भत्र्सना का भाव प्रकट होना चाहिए। अदालतो को न केवल आरोपी के अधिकारो को ध्यान में रखना चाहिए, बल्कि अपराध से पीड़ित और समाज के हितो को ध्यान में रखते हुए सजा देना चाहिए। जहां आरोपी के द्वारा नाबालिग के साथ उसका व्यपहरण करके सामूहिक बलात्कार की घटना की गई है, यह स्थिति न केवल अमानवीय है बल्कि न्यायिक विवेक को हिला देने वाली है। ऐसे मामलो में सजा देते समय उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना उचित नही होगा। एडीपीओ केके गौतम ने जानकारी दी कि कोर्ट ने मामले के आरोपी मुकेश यादव और बुद्धू साहू को दोषी करार देते हुए आईपीसी की धारा 376(2) में आजीवन कारावास के साथ दो-दो हजार रुपए के जुर्माना की और धारा 363 तीन-तीन साल की कठोर कैद के साथ एक-एक हजार रुपए जुर्माना की सजा दी। साथ ही धारा 366 में दस-दस साल की कठोर कैद के साथ दो-दो हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई। कोर्ट ने जुर्माना की राशि में से दस हजार रुपए पीड़िता को बतौर प्रतिकर देने का भी आदेश दिया है।
