रायपुर। फिर एक फैक्टरी मालिक की लापरवाही के चलते एक मजदूर की असमय मौत हो गई है। 24 वर्षीय मृतक शत्रुघन मरकाम महज दो सौ रुपए रोजना पर फैब्रीकेशन कंपनी में हेल्पर का काम करता था। करंट लगने से उसकी मौत हुई और अब दो दिनों से उसका शव अस्पताल की मरच्यूरी में पड़ा है। गरीबी के हालात के चलते परिजन अस्पताल से उसका शव तक नहीं ले जा पा रहे हैं। उधर मजदूर की मौत के बाद कंपनी का कोई भी व्यक्ति परिजनों की सुध तक लेने नहीं आया।
आंबेडकर अस्पताल की मरच्यूरी के बाहर मृतक शत्रुघन का भाई भरत विलाप कर रहा है। उसकी आंखों के सामने ही सोमवार की दोपहर भाई की असमय मौत हुई थी। भरत ने बातया कि दो सौ रुपए रोजी पर वे दोनों भाई गिरीश फेब्रिकेशन नाम की कंपनी में काम करते थे।
आशापुरा साइट पर सोमवार को इलेक्ट्रिक वायरिंग का काम चल रहा था। साइट पर पानी भरा हुआ था। इसके बावजूद ठेकेदार ने बिना सेफ्टी इक्यूपमेंट के उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया। दोनों पांचवे माले पर काम कर रहे थे, इसी दौरान करंट लगने की वजह से शत्रुघन की मौत हो गई।
भरत ने बताया कि उनके परिवार की माली हालत बेहद खराब है। दोनों भाई दिनभर में मिलकर करीब 400 रुपए कमाते हैं, जिससे उनके परिवार का गुजारा होता है। शव को अस्पताल से ले जाने और उसके दाह संस्कार के लिए भी परिजनों के पास पैसे नहीं हैं। संबंधित कंपनी के अधिकारियों को बार-बार फोन करने के बाद भी उनकी तरफ से कोई मदद नहीं मिली।
