जनजातियों के मुकदमे वापस लेने के बयान मुख्यमंत्री दे रहे हैं चुनावी सभा में अल्पसंख्यकों के भी मुकदमे वापस हो
धार और जबलपुर में विश्व शांति दिवस ईद मिलादुन्नबी जुलूस पर पुलिसिया कहर
कांग्रेस बोली सरकार दे जवाब, बीजेपी ने साधा मौन
कहीं मुख्यमंत्री शिवराज की छवि धूमिल करने की साजिश तो नहीं
भोपाल बाकानेर (सैयद रिजवान अली)
अमन और शांति का पैगाम देने वाले इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब की सालगिरह विश्व शांति दिवस पर प्रदेश के दो शहर विषाद से भर गए। धार और जबलपुर में मुस्लिम समुदाय के जुलूसों पर पुलिस की लाठियां कहर बनकर बरसीं। इस दौरान धार में पुलिस जवानों ने सारी हदें तोड़ते हुए इस्लाम की अहम निशानियों में शामिल दाढ़ी को नोच डाला। मामले को लेकर अब कांग्रेस इस पूरे मामले को सरकार की शह पर की गई कार्यवाही बता रही है। जबकि भाजपा से जुड़े मुस्लिम नेताओं ने अपने शब्दों को मुंह में कैद कर लिया है।
धार में रूट डायवर्ट को लेकर विवाद
धार जिला मुख्यालय पर कोरोना गाइडलाइंस के चलते छोटे रूट पर ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकालने की अनुमति दी गई। प्रशासन और आयोजकों के बीच बंद कमरे में तय किए गए रूट की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंच पाई। जिसका नतीजा यह हुआ कि मंगलवार सुबह जब जुलूस पिंजारवाड़ी चौराहे पर पहुंचा तो पुलिस ने लोगों को पुरानी नगर पालिका की ओर मोड़ने के लिए कह दिया। जबकि जुलूस अपने परंपरागत मार्ग मोहन टाकीज, हथवाड़ा होते हुए अपने गंतव्य की तरफ बढ़ना चाहता था। जबरिया आगे बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ पर पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज कर दिया। जिससे भगदड़ मच गई।
मामला इससे बिगड़ा
मोहन टाकीज चौराहे पर बेरीकेट्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे लोगों में से मुस्लिम समाज के व्यक्ति की एक पुलिसकर्मी द्वारा दाड़ी पकड़कर मारपीट कर दी। जिससे माहौल फिर गर्मा गया। इस बीच एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने माइक से लोगो समझाइश भी दी धार कलेक्टर डॉक्टर पंकज जैन के प्रयास से बाद में परंपरागत मार्गो से जुलुस निकाला गया। जिसका समापन फातेहा और अमन चैन की दुआ के साथ हुआ।
मुस्लिम समाज घर की महिलाओं ने जिला पुलिस अधीक्षक धार जिला कलेक्टर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मांग की उनके परिवार बच्चों पर दर्ज मुकदमे वापस हो शांति से हल हो इंसाफ हो।
जबलपुर में भी बने यही हालात
धार की ही तरह जबलपुर में भी रूट को लेकर विवाद की स्थिति बनी। यहां मुस्लिम समाज की बैठक में अधिकारियों ने छोटा रूट तय किया था। पुलिस ने मिश्रित आबादी से जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी थी। इसे लेकर सभी प्रमुख तिराहे-चौराहे पर बेरीकेट लगा दिया गया था। दोपहर दो बजे के लगभग रजा चौक और बहोराबाग से सुब्बाशाह मैदान में जाना था। पूर्व के वर्षों में ये जुलूस अंजुमन में समाप्त होना था। पुलिस ने अंजुमन जाने वाले मार्ग को बेरीकेट लगाकर किले में तब्दील कर दिया था। जुलूस को मछली मार्केट से होते हुए सुब्बा शाह मैदान तक जाना था, लेकिन जुलूस मछली मार्केट से सर्राफा की तरफ बढ़ना चाहता था। इसी तरह खरगोन जिले के ग्राम बेड़ियां में और बड़वानी जिले के राजपुर में भी अल्पसंख्यकों पर निशाना साधा गया जिसकी सभी समाज के लोगों ने निष्पक्ष जांच करते हुए कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस ने माना सरकार की तानाशाही
अनुमति के बाद निकाले गए जुलूस पर पुलिस का लाठी चार्ज अफसोसजनक है। गृहमंत्री को मामले को गंभीरता से लेकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही करना चाहिए।
आरिफ मसूद, विधायक (भोपाल)
मामले की जानकारी मिली है। शांति के लिए निकाले जा रहे जुलूस पर प्रशासन की हठधर्मिता सरकार की मंशा को कठघरे में खड़ा करती है। मुख्यमंत्री जनजाति समाज के लोगों पर लदे मुकदमों को वापस लेने की बात करती है उसी तरह अल्पसंख्यकों के भी मुकदमे वापस हैं उनके साथ भी इंसाफ हो
डॉ हीरालाल अलावा,
विधायक (मनावर=धार)
प्रशासन ने जो रूट तय किया था, उसका अनाउंसमेंट शहरभर में करवाया जाना चाहिए था। इस वजह से बने हालात का जिम्मेदार पुलिस प्रशासन है।
एडवोकेट मुजीब कुरैशी,
प्रदेश अध्यक्ष
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग
एक और जहां शिवराज सिंह मुख्यमंत्री उपचुनाव में जनजाति के लोगों के कोर्ट प्रकरण मुकदमे वापस लेने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर प्रदेश में अल्पसंख्यकों पर झूठे मुकदमे ला दे जा रहे हैं ऐसा क्यों कहीं अधिकारी शिवराज की छवि को धूमिल करने पर तो नहीं तुले हैं इस और भी शिवराज ने ध्यान देना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक विकास कमेटी
रियाजुद्दीन शेख
पूरे प्रदेश में ईद मिलादुन्नबी पर जहां भी अल्पसंख्यकों पर जाती हुई है उस की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें इंसाफ मिले
पूर्व राज्यपाल वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजीज कुरैशी
भाजपा नेताओं ने साधी चुप्पी
धार और जबलपुर में हुए मामलों को लेकर जब भाजपा से जुड़े मुस्लिम नेताओं से संपर्क किया गया तो वे बात को टालते नजर आए। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रफत वारसी ने कई बार कॉल करने पर भी फोन रिसीव नहीं किया। जबकि उपाध्यक्ष एम एजाज खान ने मामले की जानकारी होने से इंकार कर दिया। भाजपा सरकार में मप्र वक्फ बोर्ड के चेयरमैन और कैबिनेट मंत्री का दर्जा पा चुके शौकत मोहम्मद खान ने इस मामले को देखने की बात कह कर कुछ कहने से इंकार कर दिया। इसी तरह मप्र हज कमेटी के अध्यक्ष और अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके डॉ सनव्वर पटेल ने ये कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें पार्टी की तरफ से किसी तरह का बयान देने का अधिकार नहीं है।
