नई दिल्ली.देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जज एक साथ मीडिया के सामने आए। साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट का एडमिनिस्ट्रेशन ठीक से काम नहीं कर रहा है और चीफ जस्टिस की ओर से ज्युडिशियल बेंचों को सुनवाई के लिए केस मनमाने ढंग से दिए जा रहे हैं। इससे ज्युडिशियरी के भरोसे पर दाग लग रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इंस्टीट्यूशन को ठीक नहीं किया गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। बता दें कि इस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ मौजूद थे। कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चीफ जस्टिस ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को मीटिंग के लिए बुलाया। उधर, सरकार ने कहा है कि वह इस मामले में दखल नहीं देगी।
चीफ जस्टिस पर मनमानी का आरोप लगते हुए कहा कि यदि व्यवस्था थी नही हुई तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा
4 जजों की क्या है शिकायत?
चारों जजों ने चीफ जस्टिस को 7 पेज का एक लेटर भेजा है। यह लेटर उन्होंने मीडिया को भी सौंपा। इसमें लिखा है, “ये निश्चित और तय सिद्धांत है कि चीफ जस्टिसही रोस्टर का मालिक होता है, जिसके पास ये अधिकार होता है कि वो ये तय करे कि किन मामलों में कौन से जज या बेंच में सुनवाई की जानी चाहिए। चीफ जस्टिस को ये रोस्टर तय करने की परंपरा इसलिए है ताकि कोर्ट का काम अनुशासित और प्रभावी ढंग से होता रहे। लेकिन, इससे ये नहीं माना जाना चाहिए कि चीफ जस्टिस का ओहदा साथियों से ऊपर है। इस देश की न्याय व्यवस्था में ये अच्छी तरह स्थापित है कि चीफ जस्टिस सभी बराबर के साथियों में प्रथम हैं, ना उनसे ऊपर और ना ही उनसे नीचे।”

चीफ जस्टिस ने अपनी पसंद से सौंपे केस
– लेटर में यह भी लिखा है कि ऐसे कई उदाहरण हैं जिनके देश और ज्युडिशियरी पर दूरगामी असर हुए हैं। चीफ जस्टिसेज ने कई केसों को बिना किसी तार्किक आधार के ‘अपनी पसंद’ के हिसाब से बेंचों को सौंपे हैं। ऐसी बातों को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी लिखा कि ज्युडिशियरी के सामने असहज स्थिति पैदा ना हो, इसलिए वे अभी इसका डिटेल नहीं दे रहे हैं, लेकिन इसे समझा जाना चाहिए कि ऐसे मनमाने ढंग से काम करने से इंस्टीट्यूशन (सुप्रीम कोर्ट) की इमेज कुछ हद तक धूमिल हुई है।
‘कोई ये न कहे कि हमने आत्मा बेच दी’-जस्टिस जे चेलामेश्वर
– प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जस्टिस जे चेलामेश्वर ने कहा कि हम चारों मीडिया का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। किसी भी देश के कानून के इतिहास में यह बहुत बड़ा दिन है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, क्योंकि हमें यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए की, ताकि कोई ये न कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी है।
– उन्होंने कहा कि बीते कुछ महीनों में सुप्रीम कोर्ट में बहुत कुछ ऐसा हुआ, जो नहीं होना चाहिए था। हम आपसे इसलिए बात कर रहे हैं, क्योंकि हम देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी से नहीं भागना चाहते। हमने चीफ जस्टिस को एहतियाती कदम उठाने और मनाने की कोशिश की। उन्हें लेटर भी लिखा, लेकिन नाकाम रहे।
‘आपके शब्द हमारे मुंह में न डालें’
– जस्टिस चेलामेश्वर से पूछा गया कि क्या वे चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग लाना चाहते हैं? इस पर उन्होंने कहा, “आप अपने शब्द हमारे मुंह में मत डालिए।”
मोदी ने कानून मंत्री को मीटिंग के लिए बुलाया
– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद नरेंद्र मोदी ने फौरन केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को मीटिंग के लिए बुलाया।सरकार ने कहा है कि वह इस मामले में दखल नहीं देगी।
कौन हैं ये जज:-
- जस्टिस जे चेलामेश्वर- सुप्रीम कोर्ट के दूसरे नंबर के सबसे सीनियर जज हैं। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एडीशनल जज और 2007 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। उन्हें केरल हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। अक्टूबर 2011 में वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
- जस्टिस रंजन गोगोई-जस्टिस रंजन गोगोई ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली। इससे पहले वे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे। वे गुवाहाटी हाईकोर्ट में भी अपनी सेवा दे चुके हैं।
- जस्टिस मदन लोकुर-जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने 1977 में बतौर लॉयर करियर की शुरुआत की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत की। वे फरवरी 2010 से मई तक दिल्ली हाईकोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस रहे। जून में वे गुवाहाटी हाईकोर्ट और बाद में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने।
- जस्टिस कुरियन जोसफ-जस्टिस कुरियन ने कानून के क्षेत्र में अपना करियर 1979 से शुरू किया। 2000 में उन्हें केरल हाईकोर्ट को जज बनाया गया। 2010 में वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 8 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
