नई दिल्ली। भारत की राजनीति का यह बड़ा घटनाक्रम है। आप कह सकते हैं कि जन्मजात वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, कांग्रेस में पीएम पोस्ट के लिए सबसे योग्य और कांग्रेस के अभिमान का प्रतीक पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैम्प को संबोधित करेंगे। इसे संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष भी कहा जाता है। यह आरएसएस का सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग केंप होता है। इसमें शामिल होने वाले लोग ही प्रचारक बनते हैं।आरएसएस और मुखर्जी के ऑफिस के सूत्रों ने इस खबर की पुष्टि की है। प्रचारक बनने की योग्यता के लिए होने वाले आरएसएस के संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष के शिविर में शामिल होने के लिए मुखर्जी को आमंत्रण भेजा गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। इस शिविर को ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैम्प यानी ओटीसी भी कहते हैं।
मुखर्जी के ऑफिस से जुड़े एक अधिकारी ने अखबार को बताया, ‘वह इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नागपुर जाएंगे। वह नागपुर में दो दिन रहेंगे और 8 जून को वापस लौटेंगे। अपने पूरे राजनीतिक करियर में कांग्रेस से जुड़े रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस की सरकारों के दौरान वित्त, रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले हैं, जबकि आरएसएस, भारतीय जनता पार्टी का मातृ संगठन है। बताया जाता है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रणब मुखर्जी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बीच अच्छे रिश्ते बन गए हैं। मुखर्जी के ऑफिस से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ‘प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद भागवत को कई बार राष्ट्रपति भवन आने का न्योता मिला था और दोनों के बीच भारत की संस्कृति, दर्शन जैसे कई मसलों पर चर्चा हुई थी।’
