लॉकडाउन के साइड इफ़ेक्ट
भूख का निवाला बन रहे गरीब
24 घण्टे में 5 फुटपाथियों की मौत
अकील अंसारी
भोपाल। राजधानी में लॉकडाउन के साइड इफेक्ट नजर आने लगे हैं। फुटपाथ पर रहने वाले गरीबों की मौत की फिक्र किसी को हो या ना हो लेकिन 24 घंटे में 5 मौतों ने राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। हो सकता है इनकी मौत भूख से हुई है, लेकिन गरीबों की मौत की जांच कौन करेगा। अगर यही सब कुछ चलता रहा तो आने वाले समय में फुटपाथ पर रहने वाले ना जाने कितने गरीब लॉक लॉकडाउन की भेंट चढ़ जाएंगे। सरकार ने लॉकडाउन के आदेश देते वक़्त कहा था कि गरीबों का ख्याल रखा जाएगा, लेकिन गरीबों की सुविधाएं सिर्फ कागजों तक ही सिमटकर रह गईं, जिसके साइड इफेक्ट अब सामने आने लगे हैं। पिछले 24 घंटों में राजधानी में 5 मौतें फुटपाथ पर रहने वालों की हुई है। इनमें हमीदिया अस्पताल और बस स्टैंड पर दो-दो शव बरामद हुए हैं, जबकि एक गरीब का शव तलैया थाने के सामने कालीजी के मंदिर परिसर के पास मिला है। ये सभी राजधानी की वो जगहें हैं जो भिखारियों का आसरा मानी जाती हैं। स्वाभाविक है इनकी मौत या तो भूख से हुई होगी या कोरोनावायरस से, जांच करने के बाद उसका खुलासा हो पाएगा लेकिन गरीब की मय्यत है इसको कांधा तो दूर इनका अंतिम संस्कार भी ठीक ढंग से रीति रिवाज से हो जाए यही बहुत बड़ी विडंबना है। लॉकडाउन लगाने के दौरान cm शिवराज सिंह ने इस बात पर जोर दिया गया था कि गरीबों के खाने का इंतजाम सरकार करेगी। सरकार ने इसके लिए अफसरों को जिम्मेदारी भी दी थी और कहा था कि कोई भी गरीब भूखा नहीं रहेगा और खाना पहुंचाने की जिम्मेदारी भी अफसरों को दी गई थी, लेकिन मुझे नहीं लगता कि कहीं कोई व्यवस्था की गई हो। अगर की गई होती तो परिणाम इस तरह के ना आ रहे होते।
जिनको मिलता है वह खाते नहीं और जिनको जरूरत है उनको मिलता नहीं
लॉकडाउन में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों और होमगार्डों को शासन की ओर से भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए जाते हैं लेकिन इनमें से बमुश्किल 10 परसेंट कर्मचारी ही इसका इस्तेमाल करते हैं। बाकी तो अपने घर से लाया गया खाना ही खाते हैं। बचे हुए पैकेटों को कई पुलिसकर्मी मानवता दिखाते हुए गरीबों को बांट देते हैं, लेकिन जहां इनकी संख्या कम रहती है वहां यह पैकेट व्यर्थ ही चले जाते हैं । सरकार को चाहिए कि इन्हीं पैकेटों में से गरीबों और भिखारियों को भी अगर बांट दिया जाए तो सैकड़ों गरीबों तक भोजन आसानी से पहुंच जाएगा। यही नहीं अगर हर पॉइंट पर यह पैकेट पहुंचा दिए जाए तो पुलिसकर्मी ही इनको अपने आसपास मौजूद जरूरतमंदों गरीबों और फुटपाथ पर रहने वालों को दे सकते हैं। इससे कई गरीबों का पेट भर जाएगा और उनकी रोजी-रोटी की समस्या भी खत्म हो जाएगी।
