जितेंद्र नरवरिया
ग्वालियर – महानगर ग्वालियर में विगत 5 दिनों से अपनी 6 सूत्रीय जायज़ मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे सर्व पत्रकार संगठन की ग्वालियर इकाई ने पत्रकारों के हितों की जिस लड़ाई की शुरुआत की और उसे अंजाम तक ले जाने का जो दंभ दिखाया है , लगता है अब वास्तविक न्याय की उम्मीद की जा सकती है, विचारणीय विषय यह भी है कि पुराने तमाम पत्रकार संगठन इस आंदोलन से दूर रहे ,दुखद है यह रवैया ? इससे यह भी सिद्ध होता है कि वह वास्तविक आम आदमी जागने लगा है और वह अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने में सक्षम भी है चाहे वह पत्रकार संगठन हो या कोई अन्य संगठन के द्वारा शासन प्रशासन के खिलाफ अधिकारों की लड़ाई हो l
और यही देश समाज के हित की लड़ाई एक दिन क्रांती बनकर उभरेगी तब जाकर सही आजादी मिलेगी l
सर्व पत्रकार संगठन के द्वारा किए गए आंदोलन से न्याय की उम्मीद ही नहीं बल्कि अपने अधिकारों को छीन कर अपने हक को पाने का एक रास्ता तैयार किया गया है ,पत्रकारों के इस आंदोलन की वजह से सरकार की जो साख गिरी है वह हर शहरवासी समझ रहा है साथ ही विपक्षी राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनाव में यह एक मुद्दा भी बन गया है कि आखिर क्यों चौथे स्तंभ को सड़क पर आने की जरूरत पड़ गई ? आखिर क्यों यह तो आजादी से पहले के जमाने को याद दिलाने वाली बात है आखिर क्यों आई यह नौबत l
दरअसल वर्षों से चले आ रहे पत्रकार संगठनों ने आज तक दिन रात मेहनत करने वाले , अपना तन मन धन झोकने वाले पत्रकारों की लड़ाई को कभी इमानदारी से लड़ा ही नहीं गया उन्हें न्याय दिलाने की उनके अधिकार बताने की जरूरत ही नहीं समझी गई और अपने निजी स्वार्थ को आगे करके पत्रकारों के हितों को मारा गया इसलिए उन्होंने अपने अधिकारों के लिए, अपनी जायज़ मांगों के लिए ,अपने साथ हो रही बेईमानी ,और पुलिस प्रताड़ना जैसे मामलों के लिए स्वयं ही एक मंच तैयार किया और लड़ाई की शुरुआत कर दी l
यहां यह बताना जरूरी है यह अंजाम नहीं पत्रकारों के हितों की लड़ाई की शुरुआत है अब जब संघर्ष शुरू हुआ है तो अंजाम तक भी पहुंचेगा l धन्यवाद साथियों का जिन्होंने अलग-अलग सामाजिक संगठनों विपक्षी राजनीतिक दलों से होकर भी हमें समर्थन दिया आगे भी यही उम्मीद रहेगी l पर यह तय है कि अब अधिकारों के लिए भीख नहीं युद्ध लड़ना होगा l
