इंदौर। ये अफसरों की लापरवाही की हद है या व्यवस्था की जड़ता कि 20-25 साल से अलग-अलग अदालतों में केस चल रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन की ओर से न जवाब पेश हुआ, न दावा। तीन महीने पहले जब मुख्य सचिव बीपी सिंह ने इंदौर आकर राजस्व विभाग की समीक्षा की थी तब यह जानकारी छिपाई गई थी, लेकिन अब जाकर ऐसे करीब 1700 केस उभरकर सामने आ गए हैं।
सामने आए प्रकरणों में करीब 800 प्रकरण सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला कोर्ट, जबकि करीब 900 केस प्रशासन के ही अधीनस्थ न्यायालयों में चल रहे हैं। इनकी पड़ताल के लिए प्रशासन अब फिक्रमंद हुआ है, लेकिन पता चला है कि इनमें से कई केस की फाइलें ही गायब हैं। इनमें से 90 फीसदी से अधिक केस सरकारी जमीन से जुड़े हैं, जिन पर या तो कब्जे हैं या ये भू-माफिया की गिरफ्त में हैं।
इंदौर में ये व्यवस्था प्रशासन के ही उन अफसरों और बाबुओं की देन है जो भू-माफिया को अनुचित लाभ पहुंचाना चाहते थे। कुछ फाइलें पुराने एसडीएम और तहसीलदारों के कार्यालयों से गायब हुई हैं तो कुछ फाइलें रीडरों ने रफा-दफा कर दीं। इसके पीछे यही मंशा रही कि भू-माफिया के खिलाफ समय पर जवाब-दावा पेश न हो और शासन का पक्ष कमजोर साबित हो। इन तमाम फाइलों के लिए तलाशी अभियान शुरू किया गया है।
इंदौर-उज्जैन संभाग में 23 हजार केस
राज्य शासन के खिलाफ उच्च न्यायालयों में इंदौर और उज्जैन संभाग के ही करीब 23 हजार मामले चल रहे हैं। इनमें जमीन, मुआवजा, कर्मचारियों के सर्विस मेटर आदि हैं। कई बार कलेक्टरों को पता नहीं चल पाता कि शासन के खिलाफ हाई कोर्ट में कहां-कौन सा केस चल रहा है। इस कारण कई बार हाई कोर्ट में भी समय पर जवाब पेश न होने से शासन को हार का सामना करना पड़ता है।
इसी व्यवस्था को ठीक करने के लिए शासन ने हर संभाग में जॉइंट कमिश्नर लिटीगेशन की नियुक्ति की है। इनका काम महाधिवक्ता और जिलों के बीच हाई कोर्ट के प्रकरणों को लेकर समन्वय कायम करना है। संभागायुक्त और जॉइंट कमिश्नर लिटीगेशन की ओर से हाल ही में इंदौर कलेक्टर को 718 ऐसे प्रकरणों की सूची भेजी गई है जो शासन के खिलाफ हाई कोर्ट में चल रहे हैं।
कानूनी मामलों के लिए हर कलेक्टोरेट में जेसी शाखा
शासन के खिलाफ लड़े जाने वाले जमीन संबंधी प्रकरणों में प्रशासन को ही पार्टी बनाया जाता है। शासन की ओर से जवाब देने के लिए जिला प्रशासन ही जिम्मेदार होता है। हर जिले में कलेक्टर के मातहत विभिन्न् शाखाओं की तरह न्यायालयीन केस (जेसी) शाखा भी होती है। कलेक्टर अपने किसी अधिकारी को इस शाखा का प्रभारी बनाते हैं। जेसी शाखा में उन सारे केस की फाइलें रहती हैं जो शासन की ओर से या शासन के खिलाफ कोर्ट में लगाए जाते हैं। संबंधित ओआईसी को इनके बारे में बताना जेसी शाखा का ही काम है।
अधिकांश कोर्ट की सूची बनाई
अधिकतर कोर्ट केस चिन्हित कर लिए गए हैं। उनकी सूची भी बना ली गई है। इसके लिए संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को ओआईसी भी बना दिया गया है। उनसे पूछा जा रहा है कि शासन के खिलाफ प्रकरणों में जवाब क्यों नहीं दिया, फाइल कहां हैं। फाइलें तलाशने की जिम्मेदारी भी उन्हीं को दी गई है। जो अधिकारी दोषी होंगे, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे।
कैलाश वानखेड़े, अपर कलेक्टर
