गैर अस्वीकृत पत्रकारों को समान मुआवजा देने की मांग
हाईकोर्ट ने मुख्य शासन सचिव वित्त विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को जारी किए नोटिस
जोधपुर ! ललित अग्रवाल! राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने कोरोना संक्रमण से हुई पत्रकारों की मौत के मामले में राज्य सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता के आदेश के खिलाफ एवं गैर अस्वीकृत पत्रकारों को समान लाभ देने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को मुख्य शासन सचिव, वित्त विभाग के सचिव और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव को नोटिस जारी किए!
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती व जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने चंद्रशेखर व्यास बनाम राजस्थान सरकार मामले में सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किये हैं!
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजेंद्र सरस्वती ने बताया कि इस जनहित याचिका मे कि सभी मीडिया और प्रेस व्यक्तियों को फ्रंट लाइन कोविड योद्धाओं के रूप में मानने और कोविड से प्रभावित होने या मामले में उन्हें समान लाभ देने की मांग रखी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अप्रार्थी से जवाब तलब किया!
पत्रकार चंद्रशेखर व्यास द्वारा दायर की गई इस जन याचिका के माध्यम से मांग की गयी कि गैर अधिस्वीकृत या अधिस्वीकृत पत्रकारों में सरकार को केंद्र सरकार की तर्ज पर भेदभाव नहीं करते हुए को सभी कोरोना संक्रमण से दम तोड़ने वाले पत्रकारों के परिवार को फ्रंट लाइन वॉरियर मांगते हुए राज्य सरकार द्वारा घोषित 50 लाख मुआवजा राशि दी जाए !
भले ही वह अथिस्वीकृत नहीं है लेकिन पत्रकार है !
याचिकाकर्ता व्यास ने बताया कि कोरोना काल में पत्रकारों ने फ्रंट लाइन वॉरियर का फर्ज निभाते हुए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से दिन रात फील्ड में रहकर कार्य किया तथा कोरोना से संबंधित सभी खबरों का प्रसारण किया! इस दौरान कई पत्रकार और उनके परिवार के लोग को न संक्रमित हुए! जिनमें से कई पत्रकारों की कोरोना के चलते मृत्यु हो गई! कैसे मैं पत्रकारों के परिवारों पर सिर्फ इसलिए वज्रपात हुआ क्योंकि वो अपना फर्ज निभा रहे थे!
केंद्र सरकार ने अधिस्वीकृत व गैर अधिस्वीकृत पत्रकारों में कोई फर्क ना करते हुए! 5 लाख मुआवजा राशि प्रदान की है!
ऐसे में राज्य सरकार को भी इस मामले में पत्रकारों के परिवार को न्याय प्रदान करते हुए 50 लाख रूपये की मुआवजा राशि देनी चाहिए!
