।अशफाक कायमखानी।
झूंझुनू।
राजस्थान के शेखावाटी जनपद के झुंझुनूं जिले की कांग्रेस मे लोकसभा उम्मीदवार को लेकर भारी घमासान मचने के अलावा अलग अलग नेताओं के समर्थकों मे सिरफुटौव्वल की स्थिति बनी हुई है।
लोकसभा उम्मीदवार को लेकर जयपुर मे मुख्यमंत्री सहित पार्टी के अनेक दिग्गज नेताओं की मोजूदगी मे मुख्यमंत्री निवास मे एक दफा व दो दफा झूंझुनू मे प्रभारी सचिव काजी निजामुद्दीन व प्रभारी मंत्री परशादीलाल मीणा की मोजूदगी मे हुई बैठको मे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डा. चंद्रभान, पूर्व विधायक श्रवण चोधरी व विधायक विजेंदर ओला समर्थकों मे आपसी तकरार व संघर्ष से कांग्रैस की एकजुटता तार तार होती नजर आ रही है।
झूंझुनू से सांसद रहे शीशराम ओला की मृत्यु के बाद उनकी पूत्रवधु राजबाला ओला ने पीछला लोकसभा चुनाव कांग्रैस की टिकट पर झूझूनु से लड़ा था।पर भाजपा की उम्मीदवार संतोष अहलावत के सामने ओला मात खा बैठी ओर अहलावत चुनाव जीतकर सांसद बन गई थी। लेकिन पूर्व जिला प्रमुख राजबाला ओला अपने झूझंनू विधायक पति विजेंदर ओला की मदद से एक बार फिर अब लोकसभा की टिकट पाने के लिये भागदौड़ कर रही है। जबकि उसके मुकाबले मे पांच दफा विधायक रहे व अब चुनाव हार चुके श्रवण चोधरी व पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डा. चंद्रभान भी लोकसभा की टिकट पाकर चुनाव लड़ने की गम्भीरतापूर्वक कोशिश कर रहे है। दो दफा कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव जीतने वाले राजस्थान से एक मात्र व अबतक के आखिरी केप्टन अय्यूब खा के रिस्तेदार व कांग्रैस कमेटी के प्रदेश महामंत्री शब्बीर खा भी टिकट चाहने वालो की कतार मे बताते है।
जयपुर मे मुख्यमंत्री निवास पर उम्मीदवार को लेकर हुई बैठक मे टिकट के चाहने वाले जाट समुदाय के उक्त तीनो नैताओ के समर्थकों द्वारा अपने अपने नेता के पक्ष मे जोर जोर से नारेबाजी करने से बिगड़े माहोल के चलते चंद मिनटों मे बैठक समाप्त करदी गई थी। उसके बाद झूंझुनू मे हुई पहली बैठक की ही तरह अब फिर प्रभारी सचिव काजी निजामुद्दीन व प्रभारी मंत्री परशादीलाल मीणा की मोजूदगी मे बैठक होने की शुरुआत मे नजारा पहले जैसा जोर जोर से अपने अपने नेता के पक्ष मे कार्यकर्ताओ द्वारा नारे लगाने से माहोल जब सिरफुटौव्वल का बना तो काजी व मीणा बैठक छोड़कर सर्किट हाऊस चले गये।
राजनीतिक चर्चानुसार हालात यह है कि शीशराम ओला की मृत्यु के बाद ओला परिवार विजेंदर ओला के विधायक बनने के बावजूद इस समय टिकट पाने मे जरा कमजोरी महसूस करने लगा है। जबकि 2018 के आम विधानसभा चुनाव मे श्रवण चोधरी के अपनी हार के पीछे ओला परिवार का हाथ बताने के अलावा मंडावा से कांग्रेस उम्मीदवार रही रीटा चोधरी भी नीचे नीचे इसी तरह के ओला परिवार पर आरोप लगाने से चूक नही रही है। दूसरी तरफ नवलगढ़ विधायक राजकुमार शर्मा व खेतड़ी विधायक डा.जितेन्द्र भी ओला परिवार की कारस्तानी के बारे मे धिमे स्वर मे कहते रहते है। इसके अलावा 2013 के चुनाव मे प्रदेशाध्यक्ष रहते चुनाव लड़ने वाले डा. चंद्रभान की जमानत जब्त होने के पीछे इसी तरह के आरोप भी ओला परिवार पर लगते रहे है। विधायक विजेंदर ओला इस तरह के सभी आरोपों को नकारते आ रहे है।
. कुल मिलाकर यह है कि झूझूनु लोकसभा क्षेत्र से कांग्रैस की टिकट पाने मे कौन कामयाब होता है, यह दिगर बात है। लेकिन नेताओं के मध्य खींची तलवारो को लेकर यही लगता है कि यही हालात रहे तो कांग्रैस उम्मीदवार का जीतना काफी मुश्किल हो सकता है। ज्यो ज्यो चुनाव नजदीक आ रहे है, त्यो त्यो उम्मीदवारी को लेकर नेताओं मे आपसी मनमुटाव की खाई गहरी होती जा रही है।
