भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा में विधायकों के सवाल पूछने पर लगी सेंसरशिप आखिरकार खत्म हो गई। विधानसभा ने अपने नियमों को स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही जल्द विधानसभा नियम समिति की बैठक बुलाकर इन नियमों को संशोधित कर वापस ले लेगी। हालांकि बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा ने विधानसभा के भीतर ही विपक्ष के हंगामे के बीच इन नियमों को वापस लेने की बात कही थी। हालांकि गुरुवार को विधानसभा ने आधिकारिक घोषणा करते हुए नियमों को स्थगित करने के आदेश जारी भी कर दिए। इससे पहले सुबह विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि मुलाकात का एजेंडा विपक्ष और काला कानून पर बने गतिरोध पर ही था। मुख्यमंत्री ने भी विधानसभा अध्यक्ष से इस कानून को वापस लेने की सिफारिश की। उसके बाद दोपहर में विधानसभा ने जारीआदेश कर नियमों को स्थगित कर दिया।
दरअसल, पिछले दिनों विधानसभा ने अपने नियमों में संशोधन किया था, जिसके बाद विधायकों के सवाल पूछने पर सेंशरशिप लागू हो गई थी। विधानसभा के भीतर इस मसले को लेकर जमकर हंगामा हुआ। सदन दो बार स्थगित भी हुआ
इस बीच नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा के खिलाफ ही अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सदन को दे दिया। कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह, रामनिवास रावत और दूसरे विधायकों ने जोरदारी से मसले को उठाया। विधायकों ने कहा कि जब सदन के भीतर सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं बचा है तो फिर इस सदन के होने के क्या मायने हैं। इस बहस के बीच में विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए कहा कि इन नियमों में वापस संशोधन किया जाएगा। सदन के भीतर संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी कहा कि अध्यक्ष ने नियमों में संशोधन की व्यवस्था दे दी है। इसके बाद गुरुवार को विधानसभा ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए। विधानसभा ने इन नियमों को स्थगित करने के आदेश जारी किए हैं।
पहली बार आया अविश्वास प्रस्ताव
वर्तमान विधानसभा के भीतर यह पहला मौका है जब अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव रखा है। इससे पहले ईश्वर दास रोहाणी के खिलाफ भी विश्वास प्रस्ताव विपक्ष लेकर आया था। हालांकि वह खारिज हो गया था। सीतासरन शर्मा के खिलाफ यह पहला अविश्वास प्रस्ताव है। हालांकि विधानसभा सत्र खत्म हो जाने के कारण यह अविश्वास प्रस्ताव का संकल्प खुद ही खारिज हो गया है। अगले सत्र में विपक्ष को वापस से यह लाना पड़ेगा। (साभार )
