नई दिल्ली /मप्र (छतरपुर ) एक ओर वीआईपी कल्चर और दूसरी ओर दुखद से भी ज्यादा दुखद घटना कि सडक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आगमन पर पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक रबी मोहम्मद का सडक हादसे में दुखद निधन हो गया। वही पुलिस का दूसरा कर्मी जीवन और मौंत के बीच झूल रहा है। एक प्रकार से इस सडक हादसे की शहादत ने सडक परिवहन मंत्री को छतरपुर के हाल का आईना दिखाया है। जो वीआईपी ट्रीटमेंट पाते है और सडक की प्रशासनिक सुरक्षा में सुरक्षित चले जाते है। उस जनता का दिल कचोटता है जिसके दिल में उन सडक हादसो का दर्द समाहित हो जाता है जो अपंगता या अपने परिवार को मझधार में छोड चले जाते है।
केन्द्रीय सडक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आगमन किसी के लिये सुखमय हुआ पर किसी परिवार को जिदंगी भर का दर्द दे गया। वीआईपी ड्यूटी में तैनात मोटरसाईकिल सवार पुलिस महकमे के सहायक उपनिरीक्षक रबी मोहम्मद अपने साथी के साथ लोट रहे थे। तभी मप्र के छतरपुर शहर के मुख्य व्यस्तम मार्ग बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम के सामने एक टेंकर की जोरदार टक्कर में वे गंभीर रूप से घायल हो गये। ईलाज दौरान उनकी मृत्यु हो गई जब कि दूसरा साथी जीवन पाने के संघर्ष में है। केन्द्र के सडक परिवहन मंत्री का आगमन हो और सडक हादसे में ही एक पुलिस कर्मी की मौंत हो जाये इससे अधिक शर्मनाक और दुखद पहलू क्या होगा।
ज्ञात हो कि मोदी सरकार वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात करती है। पर आज केन्द्रीय मंत्री का एक अखबार के उद्घाटन समारोह में आना हुआ तो मोदीजी के वीआईपी कल्चर से मंत्रियो के दूर रहने की सलाह जुमला बनकर रह गई। कई घंटो तक राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद रखा गया। वाहनो की कतारे लग गई पर वीआईपी आये थे तो पूरा अमला कोशिश में लगा रहा कि वीआईपी को परेशानी ना हो जाये। काश सडक परिवहन मंत्रालय का प्रभार संभालने वाले गडकरीजी को छतरपुर के हालातो का पता लग जाता। किस तरह शहर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर आमजनता रोज जान हथैली पर रख गुजरती है। रोज सडक दुर्घटनाओ में अपना जीवन कुछ लाचार कर रहे है तो कुछ अपने परिवार को जिंदेगी भर का दर्द दे जाते है। पर वीआईपी कल्चर था। दुखद यही है कि पद पर आसीन होने के बाद जनसेवको को भगवान की तरह पूजा जाने लगता है। पूरा प्रशासन अपना काम छोड पूजन कार्यक्रम में लग जाता है। क्येाकि वीआईपी कल्चर है। मंत्री भगवान बनकर आते रहेगे जो जनता के वोट से जीत भगवान बन जाते है। जनता इन्ही सडको पर अपना जिल्लत जीवन जीती रहेगी जिसकी टेक्स के रूप में वो अदायगी भी करती है।
आना जाना लगा रहता सुख आयेगा दुख जायेगा की उम्मीद पर
✒धीरज चतुर्वेदी(मप्र)
