एक तरफ तो नारी को शक्ति स्वरुपा मानकर अविवाहित कन्याओं की पूजा अर्चना की जाती है वही दूसरी तरफ उनके अधिकारों का हनन करके उन्हें बेवश भी बनाया जा रहा है। महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए देश भर में भले ही मुहिम चल रही हो और तीन तलाक जैसे मुद्दे पर चर्चित हो रही हो लेकिन हमारे ही देश में कुछ राज्य ऐसे हैं जहाँ सदियों पहले से महिलाओं को घर का मुखिया बनाया जाता है।बंगाल बिहार झारखंड में जहाँ गरीबी के चलते महिलाओं के अधिकारों का हनन हो रहा है वहीं मेघालय ऐसा राज्य है जहाँ पर रहने वाले जनजाति से जुड़े हैं और इनके यहाँ महिला परिवार की मुखिया और सम्पत्ति की अधिकारी होती है। यहाँ पर प्रायः घर की सबसे छोटी बेटी के पास सम्पत्ति का मालिकाना हक होता है इसीलिए यहाँ पर बेटियों की विशेष सुरक्षा उनके अधिकारों का हनन करके की जाती है।यहाँ पर कोई जरूरी नहीं होता है कि छोटी बेटी को ही मालिक बनाया जाय किसी भी बेटी को चुना जा सकता है लेकिन आमूमन लोग अपनी सबसे छोटी बेटी को ही मुखिया बनाते हैं। यहाँ पर बाहर से अक्सर अविवाहित लड़के आते हैं और इन मुखिया बेटियों को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उनकी सम्पत्ति पर अधिकार जमा लेते हैं। कुछ दिनों बाद में सारी सम्पत्ति बेचकर दूसरा विवाह कर लेते हैं या तलाक देकर चले जाते हैं। इसीलिए यहाँ पर मुखिया बेटियों की विशेष सुरक्षा की जाती है और उन्हें सयानी होने शादी योग्य होने तक सुरक्षित स्थान पर छिपा दिया जाता है ताकि किसी युवक की नजर न पड़े और वह अपने प्रेमजाल में फंसा न सके। जबतक लड़की की शादी तय नही हो जाती है तबतक उसे सुरक्षित स्थान से वापस नही लाया जाता है।लड़कियों की सुरक्षा के नाम पर उनके माता पिता भले ही इसे उचित मानते हो लेकिन यह स्थिति निश्चित तौर पर अमानवीय और अधिकारों पर कुठाराघात है।आजकल स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं का आतंकी अपहरण कर रहे हैं और महिलाओं की तस्करी करके उन्हें गुलाम बनाया जा रहा है। गरीबीं के ही चलते बिहार बंगाल झारखंड के कुछ गरीब लोग अपनी लड़कियों की शादी खुद नहीं करते हैं बल्कि जो लोग बाहर से आकर पसंद कर लेते हैं वह शादी की सारी व्यवस्था करते हैं। यहाँ पर गरीबी लड़कियों के अधिकारों का हनन कर रही है और गरीबीं के चलते उन्हें दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। कुछ लोग जीवनसाथी बनाकर जीवन व्यतीत कर देते हैं लेकिन कुछ इन गरीब लड़कियों को लोग बीच में ही धोखा दे देते हैं। कहते हैं कि लड़की के पास उसकी आबरू ही ऐसी होती है जिससे वह अनमोल होती है और इज्ज़त चली के बाद दूबारा लौटकर नही आती है। प्रगति और डिजिटल इंडिया के दौर में हमारी लड़कियों किसी भी क्षेत्र में युवकों से पीछे नहीं हैं। उन्हें इज्ज़त व सम्पत्ति चली जाने के डर से छिपाकर रखना उनके मूल अधिकारों का हनन है।देश आज जहाँ विकास की बुलंदियों को छू रहा है और लड़कियां हर क्षेत्र में अपने जौहर दिखा रही हैं वहीं लड़कियों को छिपाकर रखना उनके अधिकारों का हनन करने जैसा है।
