मध्य प्रदेश में बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने से लेकर महिला सशक्तिकरण के लिए लाडली लक्ष्मी योजना, लाडो योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री साइकिल योजना तो संचालित हो रही है, साथ में युवतियों को आत्मसुरक्षा के लिए सक्षम बनने हेतु शौर्या दल बनाए जा रहे हैं, मगर महिला अपराधों को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं.
एनसीआरबी की रिपोर्ट वर्ष 2016 की अवधि को लेकर आई है. यह रिपोर्ट बताती है कि देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दुष्कर्म की 38,947 वारदातें हुई हैं. इनमें सबसे ज्यादा वारदातें 4,882 मध्य प्रदेश में हुई हैं.
हर केस दर्ज करते है इसलिए आंकड़ा ज्यादा
डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में हम तत्परता से ऐसे मामले दर्ज करते हैं, इसलिये प्रदेश में बलात्कार की घटनाओं की संख्या अधिक होती है.
उन्होंने कहा कि एनसीबीआर के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या में वर्ष 2014 की तुलना में 28,756 से कम होकर वर्ष 2016 में 26,604 हुई है.
उन्होंने बताया, वर्ष 2016 में हमने महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 90 प्रतिशत आरोपियों के अभियोग पत्र अदालतों में पेश कर दिये हैं और इनमें से 3882 आरोपियों को सजा भी हो चुकी है.
बीजेपी के मंत्री ने भी दिया ये तर्क-एनसीआरबी के आंकड़ों पर मंत्री विश्वास सारंग ने तर्क दिया है कि मध्यप्रदेश में एफआईआर दर्ज की जाती है, इसलिए आंकड़े बढ़ते हैं. एनसीआरबी के आंकड़ों को लेकर विश्वास सारंग ने कांग्रेस सरकार को भी घेरा.
सारंग ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में एफआईआर दर्ज नहीं होती थी. लोगों को थाने से भगा दिया जाता था. हमारी सरकार में एफआईआर लिखती जाती है.
सिंधिया और कमलनाथ का ट्वीट हमला-बलात्कार के मामलों में मध्यप्रदेश के देश में पहले स्थान पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने ट्वीट किया, प्रदेशवासी फिर शर्मशार …एनसीआरबी की ताज़ा रिपोर्ट में भाषणवीर मामा के राज में प्रदेश में बहने – भांजियां सबसे ज़्यादा असुरक्षित….रेप में प्रदेश फिर देश में शीर्ष पर… झूठे जश्न मनाने वाली शिवराज सरकार की ये है हक़ीक़त.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया, मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा की ज़मीनी हक़ीक़त – बेहद शर्मनाक. 2016 में 4882 बलात्कार के मामले, मध्यप्रदेश फिर रेप के मामलों में नम्बर 1.
बीजेपी का दावा, सरकार है गंभीर-भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने इस मामले में कहा कि एनसीबीआर के आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि बलात्कार के अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़िता के पहचान वाले हैं. इसलिये यह एक सामाजिक समस्या है और इससे निपटने के लिये समाज के सभी वर्गो को आगे आकर प्रयास करने होंगे. प्रदेश सरकार इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिये वचनबद्ध है.
उन्होंने बताया, महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथान के लिये प्रदेश सरकार विधानसभा के चालू सत्र में 12 साल की उम्र तक की बालिकाओं के साथ दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा देने के लिये कानून में बदलाव करने जा रही है. इससे जाहिर होता है कि बलात्कार की घटनाओं के प्रति प्रदेश सरकार अति गंभीर है.
