प्रदेश में दो साल के भीतर सात हजार बलात्कार के मामले
भोपाल। महिला अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। विधि मंत्री रामपाल सिंह ने विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश किया। नए विधेयक के मुताबिक दूसरी बार महिला से छेड़खानी करने वाले व्यक्ति को कम से कम सात साल कारावास की सजा होगी, जो अधिकतम 10 साल तक हो सकेगी। इसके साथ ही कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना भी होगा।
वहीं, 12 साल तक की बालिका के साथ दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म करने पर मृत्युदंड का प्रावधान भी किया गया है। विधेयक में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (क) को खत्म करने का प्रस्ताव है। यह धारा छेड़छाड़ से जुड़ी है। हालांकि छेड़छाड़ से जुड़े कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए संशोधन विधेयक में एक प्रावधान जोड़ा गया है कि अदालत अपने फैसले में पर्याप्त और विशेष कारण बताते हुए न्यूनतम कारावास से कम अवधि के कारावास की सजा भी सुना सकती है।

सरकारी वकील का पक्ष सुने बिना जमानत नहीं
विधेयक में यह प्रावधान भी किया गया है कि महिला अपराध के आरोप में सजा पा रहे व्यक्ति की जमानत लोक अभियोजक को सुनवाई का अवसर दिए बिना नहीं हो सकेगी।
संशोधन विधेयक से क्या बदलेगा
छेड़छाड़ और आपराधिक बल प्रयोग- आईपीसी की धारा 354 (ख) में अब तक तीन से सात साल तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान था। अब पहली बार छेड़छाड़ पर तीन से सात साल तक का कारावास व जुर्माना और दूसरे या इससे ज्यादा बार दोषसिद्धी पर न्यूनतम सात साल और अधिकतम दस साल का कारावास और कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना होगा।
पीछा करना- आईपीसी की धारा 354 (घ) के तहत पहली बार दोष सिद्धी पर तीन साल तक का कारावास और जुर्माना। दूसरी बार या इससे अधिक दोषसिद्धी पर न्यूनतम तीन साल से अधिकतम सात साल तक का कारावास। न्यूनतम एक लाख रुपए का जुर्माना। अदालत पर्याप्त कारण बताते हुए तीन साल से कम अवधि की सजा भी सुना सकती है। इससे पहले पहली बार दोषसिद्धी पर तीन साल तक और दूसरे या इससे ज्यादा बार दोषसिद्धी पर पांच साल तक के कारावास का प्रावधान था।
12 साल तक की बालिका से दुष्कर्म- आईपीसी में धारा 376 क (क) जोड़ने का प्रावधान है। इसके तहत बारह साल तक की बालिका से दुष्कर्म करने पर मृत्युदंड या चौदह साल से आजीवन कारावास तक की सजा दी जाएगी। आजीवन कारावास से आशय दुष्कर्म के आरोपी को मृत्य तक जेल में रखा जाना है। इसके साथ ही धारा 376 (घ) में 12 साल तक की उम्र की बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को मृत्युदंड या न्यूनतम बीस साल के कारावास का प्रावधान है। आरोपियों को मृत्यु तक कारावास का प्रावधान भी किया गया है।
शादी का झांसा देकर संबंध- आईपीसी की धारा 493 (क) जोड़कर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने वालों को तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
