आखिरकार नरेंद्र मोदी ने एक सभा में कांग्रेस की तुलना ओरंगजेब से कर दी लगता है ।बडबोले मोदी ने अपना वाहियात बयान पहले से ही तैयार कर रखा था। मोदी गुजरात के धर्मपुरी में हुई चुनावी रैली में कहा “जहांगीर की जगह जब शहंजहा आए हैं क्या तब इलेक्शन हुआ था ?शाहजहां की जगह औरंगजेब जब आए तब कोई इलेक्शन हुआ था? बादशाह है उनकी औलाद को ही सत्ता मिलेगी यहऔरंगजेब राज उनको मुबारक।
मोदी ने जिन वंशवादी मुस्लिम शासकों जहांगीर और शहजाह का नाम लिया है उनकी छवि इंसाफ पसंद और कुशल प्रशासक की रही है।चाहे आप उन पर कई आरोप लगाओ,लेकिन उनमें कई खुबियां थी ओरंगजेब एक बहुत बड़ा बादशाह होकर भी साधारण जीवन जीता था। वह सरकारी खजाने की एक पाई का भी निजी इस्तेमाल नहीं करता था।अपनी निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए औरंगजेब छिपकर जालीदार टोपी बनाता था। टोपियों को भेष बदलकर जायरीनों को बेचता था, और उसी से अपना खर्च चलाता था। मोदी ने चुनावी रैली में इरादातन हिंदू राजाओं का जिक्र नहीं कर के मुस्लिम औरंगजेब की बात करके गुजरात में धार्मिक ध्रुवीकरण को उकसाने की कोशिश हो सकती है। ऐसा करके कांग्रेस की हिंदू विरोधी मुस्लिम परस्त छवि को हवा देना चाहते हैं ।अब सवाल उठता है कि भाजपा की मातृसंस्था जिसमें मनोनयन द्वारा पर बिठाया जाता है क्या कभी उस संस्था पर सवाल खड़े किए? लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व चुनाव में जनता की तकलीफ उनका समाधान उनकी अपेक्षाएं नीतियां घोषणा उपलब्धियां भूल बैठे हैं प्रधानमंत्री जिस पंत की पैरवी करते हैं उनकी विरोधियों की चरित्र हनन की जन्मजात बीमारी है। अफसोस की बात है कि खुद प्रधानमंत्री जैसा देश का शीर्ष नेता संप्रदायिकता को सुलगा रहा है।लेकिन किसी भी कीमत पर चुनावी जंग जीतने के लक्ष्य की वजह से प्रधानमंत्री को इस बात का कोई हक नहीं हो सकता कि वह अपने प्रतिद्वंदी का चरित्र हनन के लिए किसी भी सीमा पार कर जाए।
हारून रशीद कुरैशी
