भोपाल। मध्यप्रदेश कॉंग्रेस कमेटी विधि एवं मानव अधिकार विभाग ने गोविंदपुरा विधानसभा की भाजपा विधायक कृष्णा गौर द्वारा मिसरोद प्रखंड की टीम के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंन्त्री ममता बैनर्जी के खिलाफ धरना देने पर आपत्ति दर्ज कराते हुए लॉक डाउन उल्लंघन करने पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
प्रदेश प्रवक्ता सैयद ख़ालिद क़ैस ने एक प्रेस विज्ञप्ति में आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि शासन प्रशासन द्वारा लगाए गए कोरोना लॉक डाउन में जहां आमजन को घरों से निकलने पर पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाही की जा रही है।कलेक्टर के आदेश से धरना प्रदर्शन पर रोक के साथ धारा 144 लगाई गई है,वहां गोविंदपुरा विधानसभा की भाजपा विधायक कृष्णा गौर द्वारा मिसरोद प्रखंड की टीम के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंन्त्री ममता बैनर्जी के खिलाफ धरना देने के फोटो सोशल मीडिया पर परोसे जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि किसकी अनुमति से पंडाल लगा,धरना हुआ,लोग जमा हुआ।और यदि बिना अनुमति के यह सब हुआ तो पुलिस प्रशासन ने कारवाही क्यों नही की।यह कैसा कानून आमजन गरीब मज़दूर भूख प्यास और बेरोज़गारी से घरों में दम तोड़ रहे हैं और नेताओं को अपनी नेतागीरी चमकानी सूझ रही है। गरीब घर से निकले तो जुर्माना,जैल और नेता धरने पर बैठे तो ख़ामोशी। शिवराज सरकार में यह दोहरी नीति जन विरोधी है।
सैयद ख़ालिद क़ैस ने गोविंदपुरा विधानसभा की भाजपा विधायक कृष्णा गौर पर आरोप लगाया कि भोपाल की जनता ऑक्सीजन और उपचार के आभाव में दम तोड़ रही थी तब कहाँ थी भाजपा विधायक कृष्णा गौर ? आज ममता बैनर्जी के खिलाफ धरने की फुर्सत मिल गई। जनता ने सेवा के लिए चुना है राजनैतिक रोटियां सेकने के लिए नही।
सैयद ख़ालिद क़ैस ने कलेक्टर अविनाश लवानिया और डीआईजी इरशाद वली पर निशाना साधते हुए कहा कि धरने की अनुमति किसने और कैसे दी और यदि बिना अनुमति के धरना हुआ तो अब तक कारवाही क्यों नही हुई। कॉंग्रेस कमेटी मांग करती है कि अविलम्ब गोविंदपुरा विधानसभा की भाजपा विधायक कृष्णा गौर सहित भाजपा मिसरोद प्रखंड की टीम के खिलाफ धरना देने पर लॉक डाउन उल्लंघन का मुकदमा दर्ज किया जाए।
