नई दिल्ली. करीब 164 साल पुराने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से कपिल सिब्बल ने कहा, “मैं अदालत से पर्सनली रिक्वेस्ट करता हूं कि इस मामले पर जुलाई 2019 (आम चुनाव) के बाद सुनवाई हो।” सिब्बल ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई 7 जजों को बेंच करे। उधर, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा, “अच्छी खबर ये है कि हमने जो फॉर्मूला प्रपोज्ड किया था, उसे सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड में ले लिया है।” शिया वक्फ बोर्ड ने कहा था कि विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाए और मस्जिद लखनऊ में बनाई जाए। SC अब इस मामले की सुनवाई अब 8 फरवरी 2018 को करेगी। बता दें कि बुधवार को विवादित ढांचा गिराए जाने के 25 साल भी पूरे हो होंगे।
दस्तावेज पूरे नहीं होने का दावा खारिज
– सुनवाई शुरू होते ही कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि दस्तावेज अधूरे हैं। सभी याचिकाएं पूरी नहीं हैं।
– सिब्बल बोले, “जब कभी भी इस मामले की सुनवाई होगी, इसका गंभीर प्रभाव कोर्ट के बाहर भी पड़ेगा। लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए मैं अदालत से पर्सनली रिक्वेस्ट करता हूं कि इस मामले पर जुलाई 2019 (आम चुनाव) के बाद सुनवाई हो।”
– उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे एडीशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने सिब्बल की दलीलों को खारिज कर दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सभी संबंधित दस्तावेज और ट्रांसलेशन की हुईं जरूरी कॉपीज रिकॉर्ड में मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
– सुप्रीम कोर्ट ने सभी वकीलों से कहा, “आप लोग आपस में बैठकर बात करें। ये निश्चित करें कि सभी डॉक्युमेंट्स भरे जाएं और उनका नंबर दर्ज हो। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद टाइटल डिस्प्यूट से जुड़ी सभी अपीलों पर अगली सुनवाई 8 फरवरी 2018 को होगी।”
शिया बोर्ड का कौन सा प्रपोजल SC रिकॉर्ड में आया?
– मुस्लिमों के एक गुट ने उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बैनर तले कोर्ट में एक मसौदा पेश किया था।
– इस मसौदे के मुताबिक, विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाए और मस्जिद लखनऊ में बनाई जाए। इस मस्जिद का नाम राजा या शासक के नाम पर रखने के बजाए मस्जिद-ए-अमन रखा जाए।
अभी कितने जजों की बेंच सुनवाई कर रही है?
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा:3 तलाक खत्म करने और सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने जैसे फैसले सुना चुके हैं।
जस्टिस अब्दुल नाजिर: तीन तलाक बेंच में थे। प्रथा में दखल गलत बताया था। प्राइवेसी को फंडामेंटल राइट करार दिया था।
जस्टिस अशोक भूषण: दिल्ली सरकार और एलजी के बीच जारी अधिकारों की जंग के विवाद पर सुनवाई कर रहे हैं।
कितनी पिटीशंस दायर की गई थीं?
– मामले में 7 साल से पेंडिंग 20 पिटीशन्स इस साल 11 अगस्त को पहली बार लिस्ट हुई थीं। पहले ही दिन डॉक्युमेंट्स के ट्रांसलेशन पर मामला फंस गया था। संस्कृत, पाली, फारसी, उर्दू और अरबी समेत 7 भाषाओं में 9 हजार पन्नों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करने के लिए कोर्ट ने 12 हफ्ते का वक्त दिया था। इसके अलावा 90 हजार पेज में गवाहियां दर्ज हैं। यूपी सरकार ने ही 15 हजार पन्नों के दस्तावेज जमा कराए हैं।
दोपहर 2 बजे शुरू हुई सुनवाई
– मंगलवार दोपहर 2 बजे कोर्ट नं. 1 में 3 जजों की स्पेशल बेंच सुनवाई शुरू की। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के करियर का यह सबसे बड़ा केस है। अगले साल 2 अक्टूबर को वह रिटायर होंगे। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल और राजीव धवन हैं। रामलला का पक्ष हरीश साल्वे रख रहे हैं।
– कोर्ट ये देख रही है कि डॉक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन पूरा हुआ है या नहीं। ट्रांसलेशन नहीं होने पर पेंच फंस सकता है, लेकिन अदालत कह चुकी है कि अब सुनवाई नहीं टलेगी। 5 दिसंबर से दलीलें सुनी जाएंगी। सबसे पहले ऑरिजनल टाइटल सूट दाखिल करने वाले दलीलें रखेंगे। फिर बाकी अर्जियों पर बात होगी।
7 साल में SC में 20 अर्जियां, 7 चीफ जस्टिस बदले
– हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड 14 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर एक के बाद एक 20 पिटीशन्स दाखिल हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया, लेकिन सुनवाई शुरू नहीं हुई। इस दौरान 7 चीफ जस्टिस बदले। सातवें चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इस साल 11 अगस्त को पहली बार पिटीशन्स लिस्ट की।
HC ने विवादित जमीन 3 हिस्सों बांटने का दिया था ऑर्डर
– इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्सों में बांटने का ऑर्डर दिया था। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था।( साभार)
