नई दिल्ली. करीब 164 साल पुराने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार से आखिरी सुनवाई शुरू करेगा। इस केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के 7 साल बाद यह सुनवाई होगी। इसके लिए चीफ जस्टिस की अगुआई में तीन जजों की बेंच बनाई गई है। बता दें कि बुधवार को विवादित ढांचा गिराए जाने के 25 साल भी पूरे हो जाएंगे।
– मामले में 7 साल से पेंडिंग 20 पिटीशन्स इस साल 11 अगस्त को पहली बार लिस्ट हुई थीं। पहले ही दिन डॉक्युमेंट्स के ट्रांसलेशन पर मामला फंस गया था। संस्कृत, पाली, फारसी, उर्दू और अरबी समेत 7 भाषाओं में 9 हजार पन्नों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करने के लिए कोर्ट ने 12 हफ्ते का वक्त दिया था। इसके अलावा 90 हजार पेज में गवाहियां दर्ज हैं। यूपी सरकार ने ही 15 हजार पन्नों के दस्तावेज जमा कराए हैं।
दोपहर 2 बजे शुरू होगी सुनवाई
– मंगलवार दोपहर 2 बजे कोर्ट नं. 1 में 3 जजों की स्पेशल बेंच सुनवाई शुरू करेगी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के करियर का यह सबसे बड़ा केस है। अगले साल 2 अक्टूबर को वह रिटायर होंगे। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल और राजीव धवन होंगे। रामलला का पक्ष हरीश साल्वे रखेंगे।
– कोर्ट देखेगा कि डॉक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन पूरा हुआ है या नहीं। ट्रांसलेशन नहीं होने पर पेंच फंस सकता है, लेकिन अदालत कह चुकी है कि अब सुनवाई नहीं टलेगी। 5 दिसंबर से दलीलें सुनी जाएंगी। सबसे पहले ऑरिजनल टाइटल सूट दाखिल करने वाले दलीलें रखेंगे। फिर बाकी अर्जियों पर बात होगी।
7 साल में SC में 20 अर्जियां, 7 चीफ जस्टिस बदले

– हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड 14 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर एक के बाद एक 20 पिटीशन्स दाखिल हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया, लेकिन सुनवाई शुरू नहीं हुई। इस दौरान 7 चीफ जस्टिस बदले। सातवें चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इस साल 11 अगस्त को पहली बार पिटीशन्स लिस्ट की।
HC ने विवादित जमीन 3 हिस्सों बांटने का दिया था ऑर्डर
– इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्सों में बांटने का ऑर्डर दिया था। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था।
शिया बोर्ड ने कोर्ट में रखा था मसौदा
– बता दें कि हाल ही में मुस्लिमों के एक गुट ने उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बैनर तले कोर्ट में एक मसौदा पेश किया था।
– इस मसौदे के मुताबिक, विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाए और मस्जिद लखनऊ में बनाई जाए। इस मस्जिद को किसी राज या शासक के नाम पर रखने के बजाए मस्जिद-ए-अमन नाम रखा जाए।
