वर्तमान के समय में हर व्यक्ति किसी न किसी बात को लेकर दुखी ही है लेकिन वह ऐसा विचार करता है कि उसके जितने दुःख किसी के नसीब में है ही नहीं। दरअसल व्यक्ति को दुखों की आवश्यकता होती है क्योंकि यही चीज़े हमे महान बना सकती है लेकिन आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे संभव है। मित्रों जब हम बहुत दुखी होते है और अपने रिश्तेदार तथा चाहने वाले लोग भी जब हमारा साथ छोड़ देते है तब हमें जिस स्थिति से गुजरना पड़ता है वह भले ही हमे ख़राब लगती हो लेकिन वही स्थिति आपको महान बना सकती है।
सुख मिलने पर व्यक्ति अपने खराब समय को पूरी तरह से भूल जाता है लेकिन जब समय ख़राब चल रहा हो, तब उन्हीं चीज़ों के बारे में व्यक्ति सोचने लगता है कि यदि वह पहले से संभल गया होता तो आज ऐसी स्थिति न देखनी पड़ती, जब व्यक्ति सुखी जीवन जीने लगता है तो वह तीन सबसे बड़ी ग़लतियाँ कर देता है।
सुख आने पर व्यक्ति को धन का अभिमान इतना आ जाता है कि वह उसका प्रयोग कभी किसी की मदद करने में, करने के बजाय मात्र देखावे के पीछे खर्च करने लगता है।
धन के मोह में व्यक्ति अपने से बड़ों एवं छोटो का आदर तक नहीं करता, उनके साथ बात करना धनवान को हल्कापन लगता है लेकिन जब उसका समय ख़राब चल रहा हो, तो ऐसे ही लोग उसके काम आते है।
सुखी व्यक्ति अपने आप को राजा के सामान समझने लगता है लेकिन यह नहीं सोचता कि एक दिन उसे भी इसी मिट्टी में मिलना है समाज के साथ व्यवहार करने में उसका धन कभी काम नहीं आता है।
मित्रों, दुःख सिर्फ धन का ही नहीं होता आज समाज में आपको ऐसे लोग भी मिल जायेंगे जिनके पास पैसा खूब सारा है लेकिन उन्हें खर्च करने एवं उपभोग करने की क्षमता तक नहीं है दरअसल वे धनवान होने के बाद भी ग़रीब जैसा ही जीवन व्यतीत कर रहे है। जिसके पास धन है उसके पास अच्छा स्वास्थ्य नहीं है और स्वास्थ्य है तो उसके बच्चे उस धन का ग़लत कार्यों में उपयोग कर रहे है।
यदि आप ऐसा सोचते है कि धनवान लोग अधिक सुखी है तो वर्तमान के समय में सबसे अमीर व्यक्ति ही सुखी जीवन जीते लेकिन ऐसा तो बिलकुल नहीं है। धन मात्र व्यक्ति की आवश्यकता को पूरा करता है जब कि असली सुख परिवार के साथ खुशी के पल बिताने में, मीठा वचन बोलने में, ईमानदारी निभाने में है। दुनिया का सबसे बड़ा दुःख अकेलापन इसलिए व्यक्ति को कठोर स्वभाव का आचरण कभी नहीं करना चाहिए।
