“कुल्लो नफ्सिन जायकतुल मौत ” हर जानदार चीज़ को मौत का मज़ा चखना है।
बेशक हर जानदार चीज़ को फना होना है पर किसी का असमय जाना बड़ा दुख देता है । भाई रफीक बेग की मौत की ख़बर मिली , यकीन ही नही हुआ , एक शांत स्वभाव का सरल , मृदुभाषी , मिलनसार इन्सान इस तरह से असमय हमारे बीच से चला जायेगा ।
रफ़ीक भाई को मैं पिछले 20 सालों से जानता था , प्रदेश टाइम्स , सांध्य प्रकाश के बाद उनका आखिरी पड़ाव सच ख़बर रहा । इस अंतराल में निरन्तर उनसे सम्पर्क रहा । उनके सरल स्वभाव के कारण कई बार यह अहसास होता था कि पत्रकारिता के इस युग में वह अपने अन्य साथियों के मुकाबले इतने सरल क्यों हैं , पर वह अपनी शैली में फक्कड़ मिज़ाज तबीयत के साथ अपने कार्यों को अंजाम देते रहते थे । निसंदेह उनका असमय जाना बड़ा कष्टदायक है , उनकी कमी हमेशा खलेगी । अभी कुछ माह पूर्व ही मैंने उनको अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति मप्र में शामिल किया था , पहले भोपाल संयोजक और वर्तमान में प्रदेश सचिव के पद पर नियुक्त किया था । यह नियति ही है जो आज भाई रफीक बेग हमारे बीच से असमय चले गये ।
सैयद खालिद कैस
