आज सम्पूर्ण विश्व अर्न्तराष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के अनुसार प्राप्त अधिकारों का उपयोग कर हम भारत वर्ष में लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता की गरिमा को कायम रखने का प्रयास कर रहे है। क्योकि वर्तमान में पत्रकारिता अब भी स्वतंत्रता का अनुभव नही कर पा रही है। पत्रकारिता पर माफियाओं सहित राजनेताओं के दखल एंव अतिक्रमण का परिणाम है कि स्वतंत्र पत्रकारिता का अस्तित्व निरन्तर अपना महत्व खोता जा रहा है। पत्रकारिता के सिस्टम में चाटुकारिता की लगी दीमक ने निष्पक्ष पत्रकारिता का क्षरण कर दिया है। कारपोरेट जगत के बढ़ते प्रभाव का परिणाम है कि अब पत्रकारिता जनता की आवाज के स्थान पर धनबल का आधार बन गई है। सत्ता के इर्द गिर्द घूमने वाले पत्रकारों ने पत्रकारिता के स्तर को रसातल तक पहुचा दिया है। इस सबके बावजूद भी यदि हम कहें कि पत्रकारिता स्वतंत्र है तो यह केवल भ्रम मात्र होगा। साथियों यह कटू सत्य है कि कोरोना काल में अप्रैल 2020 से अप्रैल 2021 के अन्तराल में हमने अपने 126 से अधिक पत्रकारों की आहूति दी है। एक रिर्पोट के अनुसार केवल अप्रैल 2021 में ही हमने अपने 75 से अधिक क्रांतिकारी पत्रकारों को खोया है। यह तो सिर्फ कोरोना का दंश है। वास्तव में हमारी पत्रकार बिरादरी भूमाफिया खनन माफिया रेत फया अपराधियों से अधिक सफेद पोश राजनेताओं की गंदी राजनीति के शिकार हुए हैं। भ्रष्टाचार और घोटाले उजागर करने वाले हमारे सैकडों पत्रकारों ने अपने कर्त्तव्य निर्वाहन में अपने प्राणों की आहूति दी है। रिर्पोटर्स विदाउट वोर्डर्स आरएसपी के अनुसार वर्ष 2020 में वैश्विक स्तर पर अब तक कुल 10 पत्रकारों की हत्या कर दी गई है। और 228 पत्रकारों को कैद कर लिया गया हैं वहीं इस वर्ष अब तक 116 नागरिक पत्रकारों को भी कैद कर लिया गया है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 की 180 देशों की सूची में भारत का स्थान 142 है। जबकि 2016 में भारत 133 वें स्थान के बाद भारत की रैंक में लगातार गिरावट आई जो कि चिन्ता का विषय है। 2014 से 2019 के बीच 198 मामले पत्रकारों पर गंभीर हमलों के सामने आये है। भारत में 2010 से वर्तमान समय तक लगभग 65 से अधिक पत्रकारों की हत्यायें हो चुकी हैं। परन्तु केवल 3 मामलों में दोषियों को सजा हुई है। ताज्जुब की बात यह है कि नेशनल क्राइम रिसर्च ब्यूरो के पास पत्रकारों के खिलाफ अपराध का कोई डाटा नही है। आज भी राजनैतिक साजिशों के फलस्वरूप देश की विभिन्न जेलों में लगभग 100 से अधिक पत्रकार अकारण बंद है।

साथियों वर्तमान समय में मीडिया की अहमीयत किसी से छिपी नहीं है। जीवन के प्रत्येक विषयों में मीडिया बनाम पत्रकारिता ने अपना प्रभुत्व स्थापित किया है। यह प्रभुत्व स्थापित हुआ जब हमारे तमाम पत्रकार भाईयों ने सत्य की उजागर करने के संघर्ष में अपने प्राण तक दाव पर लगाये और निरन्तर चौथे स्तम्भ को बचाने के लिये संघर्ष जारी है। फर्जी मुदकमों का हमला तमाम सरकारे व माफिया जगत के लोग करते हे है। बड़ी संख्या में पत्रकारों में भय पैदा कर सत्य आधारित लेखनी को कुचलने के प्रयास चलते रहे हैं बावजूद इसके पत्रकारों ने अपनी जान गवां पर सत्य का मस्तक झुकने नही दिया।
पत्रकारिता व पत्रकारों पर बढ रहे हमलों की गंभीरता को लेकर सम्पूर्ण भारत में पत्रकार सुरक्षा कानून पारित कराने के लिये आन्दोलनरत् हमारा संगठन प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स चाहता है कि पत्रकारिता का सत्य सुरक्षित हो पत्रकार सुरक्षित हो उसका परिवार सुरक्षित हो। इसलिये पत्रकार सुरक्षा कानून हमारा अधिकार है। हमारी एकता ही हमारा हथियार है। पत्रकार एकता को कायम रखें।
अर्न्तराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ जय हिन्द जय भारत पत्रकार एकता जिन्दाबाद
पत्रकार एकता जिंदाबाद
सैयद खालिद के संस्थापक अध्यक्ष
