भोपाल । कल पुलिस मुख्यालय की कैंटीन मेँ डाक मतपत्र पड़े मिलने की ख़बर मिलते ही मप्र भर मेँ सनसनी फेल गई थी , कॉंग्रेस नेता की पहल पर उजागर हुई इस घटना के प्रकाश मेँ आते ही मीडिया और कॉंग्रेस का पुलिस मुख्यालय जमावड़ा लग गया था । हर ज़ुबान पर एक सवाल था यह डाक मतपत्र यहां कैसे आए ।
आज चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के माध्यम से मिली जानकारी अनुसार इस घटना की जांच पुलिस महानिदेशक एवं कलेक्टर भोपाल द्वारा की गई , जिसमें पाया गया कि होमगार्ड सैनिक व अन्य इसके लिऐ जिम्मेदार पाए गए और निर्वाचन कार्य मेँ लापरवाही बरतने वालों के विरुध्द अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा रही है । जांच रिपोर्ट मेँ पाए गए डाक मतपत्र मेँ छेड़छाड़ से इनकार किया गया ।
अब सवाल यह उठता है कि इस मामले के उजागर नही होने पर क्या इन डाक मत पत्रो के दुरुपयोग से इनकार किया जा सकता है ?
क्या यह जांच निष्पक्षता की और इशारा कर सकती है , जबकि इसके जांच आधिकारी एवं कलेक्टर भोपाल की भूमिका स्वयं पुरानी जैल स्थित स्ट्रॉंग रूम मेँ सीसीटीवी डेढ़ घंटा बंद कराने की घटना मेँ संदिग्ध हैं ।
इस कांड मेँ गोविंदपुरा क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी का हवाला आने के बावजूद उनको क्लीन चिट क्यो दी गई ।
जिम्मेदारी पोस्टमैन पर अधिरोपित कर उसको और अन्य छोटे शोहदों को घेर कर बड़ों को क्यो बक्शा गया । खैर ! जो भी हो प्रदेश मेँ इस बार ईवीएम , स्ट्रॉंग रूम और डाक मत पत्र कांड चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं ।
भोपाल से सैयद ख़ालिद कैस की रिपोर्ट
