सैयद ख़ालिद कैस समूह सम्पादक
भोपाल -प्रदेश में विधानसभा चुनाव के गुबार के शांत होते ही जो तस्वीर सामने आई वह कॉंग्रेस के लिए ठीक और भाजपा के लिए दुखदाई थी । 15 वर्ष के वनवास के बाद मध्यप्रदेश में कॉंग्रेस की वापसी कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के करिश्माई नेतृत्व और कॉंग्रेस को संगठित करके चुनाव लड़ने से मुमकिन हुई । कॉंग्रेस के चाणक्य दिग्विजयसिंह की ख़ामोशी के साथ सत्ता और संगठन पर दबाव का ही परिणाम था कि सत्ता में आई कॉंग्रेस पर उनका नियंत्रण देखा गया । भाजपा के लिए यह चुनाव काफ़ी निराशाजनक रहा । चौथी बार ताजपोशी का ख्वाब सजाए शिवराज मंत्रीमण्डल के 12से अधिक मंत्रियों का चुनाव हार जाना इस बात का प्रमाण था जनता खोखली घोषणाओं से तंग आकर बदलाव चाहती थी , परन्तु शिवराज का करिश्मा क़ायम रहना भी आश्चर्य का विषय था ।

गौरतलब हो कि अपने पुराने हथकंडों को आजमाने के बावजूद दिल्ली से भोपाल तक की सारी ताकत झोंक देने के बावजूद अमित शाह और मोदी मध्यप्रदेश में कॉंग्रेस की सरकार बनने से नही रोक पाए । कमलनाथ का कुशल नेतृत्व काम आया और कॉंग्रेस की सरकार बनी । परन्तु कॉंग्रेस सरकार बनने के बावजूद अजय सिंह राहुल की विधानसभा में गैर मौजूदगी सभी को खल रही थी । कॉंग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अजय सिंह राहुल की वरिष्ठता और कुशल मार्गदर्शन के फलस्वरूप उनको मप्र की कमान सौंपकर कॉंग्रेस को पुनः अजय सिंह राहुल मय बना दिया ।
विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव का सामना करके अपमानित होकर हारने वाली भाजपा और शिवराज का अहंकार अभी भी क़ायम था जिसको अमित शाह ने मिनटों में काफूर कर दिया और फ़िर एक बार मध्यप्रदेश में इतिहास दोहराया गया जैसे उमाभारती के बल पर भाजपा ने मध्यप्रदेश में कब्ज़ा करने के बाद उनके पर कतरे थे और प्रदेश निकाला दिया था वही स्थिति कल शिवराज के सामने आ खड़ी हुई । 12 साल शिवराज के जादू के बल पर भाजपा ने मध्यप्रदेश में कब्ज़ा जमा रखा था सत्ता जाते ही शिवराज को प्रदेश निकाले का पाठ आरम्भ किया । टाईगर जिंदा है कहने वाले शिवराज को अमित शाह ने दिल्ली से चाबुक चलाकर पिजरे में कैद कर लिया और बना दिया राष्ट्रीय उपाध्यक्ष !
अजय सिंह राहुल और मौजूदा हालात
इस विधानसभा चुनाव में 114 सीट लेकर आने वाली कॉंग्रेस ने सपा , बसपा और निर्दलीयों के साथ सरकार तो बना ली मगर कॉंग्रेस के दिग्गज एवं नेता प्रतिपक्ष रहे अजय सिंह राहुल भय्या का चुनाव हार जाना हर किसी के लिए चर्चा का विषय बन गया था । कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद कॉंग्रेस मुखिया का दायित्व निभाना कमलनाथ के लिए मुश्किल था । और कल दिल्ली दरबार पहुंचे कमलनाथ के साथ राहुल गाँधी और कॉंग्रेस हाईकमान के निर्णय उपरांत आज शाम होते होते अजय सिंह राहुल के कांधे पर मध्यप्रदेश कॉंग्रेस मुखिया की जिम्मेदारी आगई ।इस वर्ष ही कुछ माह के बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र अजय सिंह राहुल के लिए यह डगर कठिन है । दिल्ली में लालकिला जीतने के लिए सम्पूर्ण कॉंग्रेस को जी तोड़ मेहनत करनी होगी ।
कमलनाथ , सिंधिया , दिग्विजयसिंह के बाद अजय सिंह राहुल के इर्द गिर्द घूम रही कॉंग्रेस के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव अति महत्वपूर्ण हैँ । इस प्रकार अजय सिंह राहुल के पास वक्त कम है और काम ज़्यादा है । कॉंग्रेस अध्यक्ष बनते ही प्रदेश में नवीन कार्यकारिणी का गठन पर गुटबाज़ी से ग्रस्त कॉंग्रेस को एक जाजम पर लाना अजय सिंह राहुल के लिए काफी मुश्किल है । कॉंग्रेस के समस्त क्षत्रपों को साथ लेकर चलना भी कठिन कार्य है । दो बार नेता प्रतिपक्ष रहे अजय सिंह पर कॉंग्रेस अध्यक्ष का ताज कांटो भरा है , 15 साल सत्ता से दूर रहकर भाजपा से मुकाबला करने से कहीं अधिक सत्ता में रहकर कॉंग्रेस को एकजुट करके 2019 फतह का मिशन अजय सिंह राहुल भय्या के लिए चुनौतीपूर्ण होगा ।
खबरें आजतक के लिए सैयद ख़ालिद कैस की कलम से ।
