भोपाल । मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद शिवराज सरकार का सूपड़ा साफ होने के बाद कमलनाथ सरकार के आने के बाद से ही शिवराज , कैलाश विजयवर्गीय सहित कई नेताओं ने कमलनाथ सरकार को गिराने के दावे किये , परन्तु बनते बिगडते हालात ने कमलनाथ सरकार को ऑक्सीजन प्रदान की । निर्दलीय विधायको के समर्थन के बाद झाबुआ सीट पर कांतिलाल भूरिया की शानदार जीत ने भाजपा और विशेषकर कैलाश विजयवर्गीय के सपनों को चकनाचूर कर दिया । भाजपा अभी झाबुआ के ग़म से बाहर भी नही निकली थी कि उस पर एक और वज्रपात हो गया । भाजपा के पन्ना ज़िले की पवई सीट से विधायक प्रहलाद लोधी के खिलाफ एक आपराधिक मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने दो साल की सजा के बाद कल मध्यप्रदेश विधानसभा ने भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को उनकी सदस्यता समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए। लोधी की सदस्यता खत्म होने से भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। विधायक की सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी करने के बाद भारत निर्वाचन आयोग को रिक्त सीट की सूचना भेजी जाएगी। प्रदेश में यह दूसरा मामला है, जिसमें आपराधिक प्रकरण में विधायक को सजा होने पर उसकी सदस्यता समाप्त की गई है
भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी के खिलाफ अवैध उत्खनन रोकने पहुंचे तहसीलदार और सरकारी अमले पर हमला कर मारपीट का एक मामला अदालत में विचाराधीन था। इसमें विशेष न्यायालय ने सुनवाई के बाद गुरुवार को दो साल की सजा सुनाई थी। शनिवार को विधानसभा सचिवालय में अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति पहुंची, जिस पर दिनभर इसके कानूनी पहलुओं पर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने विभिन्न् लोगों से चर्चा की। कानूनविदों के साथ भी सचिवालय के अधिकारियों ने राय-मशविरा किया।
विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 2013 के लिली थॉमस विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका के फैसले के आधार पर विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(4) को समाप्त कर दिया था। इस धारा में अदालत के फैसले पर अपील अवधि तक सांसद या विधायक की सदस्यता बरकरार रहने का प्रावधान था।
विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने फैसले पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब इसकी अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया चल रही है और इसके बाद अधिसूचना की प्रति के साथ भारत निर्वाचन आयोग को पवई विधानसभा क्षेत्र के रिक्त होने की सूचना भेजी जाएगी। निर्वाचन आयोग इसके आगे की कार्रवाई करेगा।
उल्लेखनीय है कि आपराधिक प्रकरण में सजा के मामले में लोधी मध्यप्रदेश विधानसभा की सदस्यता गंवाने वाले दूसरे विधायक हैं। इसके पहले छतरपुर जिले की बिजावर विधानसभा सीट से विधायक रहीं आशा सिंह के खिलाफ भी विधानसभा ने यह फैसला किया था। 2008 से 2013 की तेरहवीं विधानसभा में आशा सिंह के खिलाफ भी एक आपराधिक मामले में अदालत ने सजा सुनाई थी और विधानसभा ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी थी।
सूत्रों के मुताबिक विधानसभा की समयावधि कम बचने के कारण निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा सीट को भरने के लिए उपचुनाव नहीं कराए गए थे। इससे आशा सिंह को पेंशन की पात्रता भी नहीं मिल सकी थी। वहीं, एक मामला नीना वर्मा का था, जिसमें अदालत ने सदस्यता समाप्त कर दी थी। हालांकि नीना वर्मा का मामला आपराधिक प्रकरण का नहीं था। विधानसभा ने उनकी सदस्यता समाप्त कर उनसे हारे कांग्रेस प्रत्याशी बालमुकुंद गौतम को विधानसभा की सदस्यता दिलवाई गई थी।
मामले में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव का कहना है कि उन्हें अब तक विधानसभा से सीट रिक्त होने की अधिकृत सूचना नहीं मिली है। जैसे ही सूचना मिलेगी, उस हिसाब से आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त होने पर भाजपा के पास 107 विधायक संख्या हो जाएगी। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल के मंत्री होने से देखा जाए तो सरकार के साथ सदस्य संख्या 116 है। ऎसे में उपचुनाव के बाद यदि कॉंग्रेस पवई सीट पर जीत का परचम लहराती है तो यह संख्या 117हो जाएगी और भाजपा का कमलनाथ सरकार गिराने का सपना कैलाश विजयवर्गीय के मुख्यमन्त्री बनने के सपने की तरह चकनाचूर हो जाऐगा
@सैयद ख़ालिद कैस
