भोपाल। राज्य शासन ने 2004 बैच के 15 अधिकारियों को डीआईजी पद पर प्रमोशन दे दिया है। इनमें से चार अफसरों को एक साल की वरिष्ठता दे दी गई है। कटनी में महिला भाजपा नेता आत्महत्या कांड में फंसाने की धमकी देकर रिश्वत लेने के आरोपी अधिकारी गौरव राजपूत की पदोन्नति रोक दी है। वहीं राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में आने वाले दो अधिकारियों अखिलेश झा व एपी सिंह को भी प्रमोशन नहीं दिया गया है।
राज्य शासन ने 2004 बैच के चार अधिकारियों बीपी चंद्रवंशी, पीएस उइके, डीएस चौधरी और आईपी अरजरिया को डीआईजी पद पर पदोन्न्त करने के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय के 28 सितंबर 2017 के आदेश के तहत एक साल की वरिष्ठता दी है। उन्हें 31 दिसंबर 2016 से प्रोफार्मा पदोन्नति दी गई है।
अखिलश झा ने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने को लेकर चल रही विभागीय जांच को लेकर कैट में याचिका लगाई थी, जिसमें शासन को जवाब देने तक डीपीसी पर रोक लगा दी गई थी। वहीं एपी सिंह के खिलाफ भी विभागीय जांच चल रही हैं। इस कारण झा व सिंह के प्रकरणों पर डीआईजी प्रमोशन में विचार नहीं किया गया।
उधर, 2004 बैच के राज्य पुलिस सेवा से भापुसे में पदोन्नत होने वाले अन्य नौ अधिकारियों राकेश कुमार जैन, अनिल माहेश्वरी, दीपक वर्मा, अशोक कुमार गोयल, एमएस सिकरवार, प्रेमबाबू शर्मा, एके पांडेय, आरए चौबे व एमएस वर्मा को फिलहाल एक जनवरी 2018 से डीआईजी बनाया गया है। हालांकि इनमें केवल राकेश जैन को छोड़कर अन्य अधिकारियों को भी जल्द ही 31 दिसंबर 2016 से प्रोफार्मा पदोन्नति मिलने की संभावना जताई जा रही है। इन अधिकारियों ने शासन के समक्ष अपना पक्ष रख दिया है।
