।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।
राजस्थान कांग्रेस मे मजबूत मुस्लिम लीडरशिप का टोटा काफी अर्शे से चले आने व कांग्रेस के संघमय होते आने से मुस्लिम कांग्रेस के ऐजेण्डे से बाहर होने की वजह से लोकसभा चुनाव मे एक मुस्लिम उम्मीदवार को जीतने के लिये टिकट ना देकर केवल मात्र एक खानपुर्ति के तौर पर टिकट दी जाती है। ऊपर से उस मुस्लिम उम्मीदवार को पार्टी की तरफ से खास मदद करने की बजाय उसको उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
राजस्थान का झूंझुनू लोकसभा क्षेत्र मात्र एक ऐसा क्षेत्र रहा रहा है जहां से अबतक पहले व आखिरी मुस्लिम लोकसभा उम्मीदवार चुनाव जीतकर सांसद बन चुका है। 1996 के बाद राजस्थान की मुस्लिम उम्मीदवार के जीतने वाली झूंझुनू सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार नही बनाया है। बल्कि केवलमात्र फोरमल्टीज करने के लिये कांग्रेस के लिये सबसे कमजोर सीट पर बदल बदलकर उम्मीदवार बनाये जाने के कारण मुस्लिम उम्मीदवार जीत नही पाता है।
चलो पूरानी टिकटो की बात छोड़ते है। लेकिन झूंझुनू से कांग्रेस उम्मीदवार केप्टन अययूब खा के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद जब से झूंझुनू की बजाय अजमेर, झालावाड़, टोक-सवाईमाधोपुर व चूरु से बतोर फोरमल्टीज करने के लिये मुस्लिम उम्मीदवार बनाये जाने लगा है, तब मुस्लिम उम्मीदवार जीत नही पा रहा है। झूंझुनू से मुस्लिम उम्मीदवार के जीतने के सबके अधिक चांसेज होने के बावजूद वहा मुस्लिम को टिकट नही देने की कसम शायद कांग्रैस ने ले रखी है।
कुल मिलाकर यह है कि कांग्रैस ने राजस्थान मे मुस्लिम को 2019 के लोकसभा चुनाव मे फिर एक दफा झूंझुनू की बजाय चूरु से रफीक मण्डेलीया को उम्मीदवार बनाया है। रफीक मण्डेलीया 2009 का लोकसभा व 2018 का विधानसभा चुनाव हार चुके है। अब 2019 के लोकसभा चुनाव मे देखते है कि मण्डेलीया के चुनाव का परिणाम क्या आता है।
