वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र व्यास की कलम से
पांच अगस्त 2020 भी 2019 के 5 अगस्त की तरह एक ऐतिहासिक दिन हो गया है | 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से धारा 370 और धारा 35 ए को ख़त्म कर इसे कश्मीर और लद्दाख में बांटा गया , और दोनों प्रदेशो को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर एक ऐतिहासिक कार्य मोदी सरकार ने किया था | अब ५ अगस्त के ही दिन प्रभु श्री राम के दिव्य देवालय की आधार शिला रखी जायेगी | देश दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक इस देवालय के भूमि पूजन को लेकर भी देश के तथाकथित सेक्युलर बेचैन हो गए हैं | उनको कुछ समझ नहीं आया तो कहने लगे सेक्युलर देश के प्रधान मंत्री को भूमि पूजन में नहीं जाना चाहिए | फिर एक और तलाशा की भूमि पूजन शुभ मुहूर्त में नहीं हो रहा है | मतलब साफ़ है की देश में मौजूद दैत्य वंशी नहीं चाहते की देश में सनातन धर्म के मानने वालों की सुनी जाए | ऐसे दानवी प्रवृति के लोगों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक नहीं चल पा रही है इस कारण बेचारे बेचैन हैं |जिन नेताओं को सनातन धर्म की यह नब्ज समझ में आ गई है वे अपने आपको राम भक्त बताने से नहीं चूक रहे हैं | अब मध्य प्रदेश के पूर्व मुयमंत्री कमलनाथ को ही देख लो वे अपने को राम भक्त बताने लगे हैं | मंदिर निर्माण के आधार शिला कार्यक्रम को ना सिर्फ वे उचित बता रहे हैं बल्कि वे चांदी की 11 ईंट भी भेज रहे हैं | मंगलवार ४ अगस्त को कमलनाथ जी के भोपाल स्थित निवास पर प्रदेश की खुशहाली, समृद्धि, उन्नति व प्रदेशवासियों के स्वस्थ्य रहने की कामना को लेकर ग्यारह पंडितों द्वारा राम दरबार सजाकर हनुमान चालीसा के पाठ का हुआ। आज ख़ुशी का दिन है। हमने प्रदेश की ख़ुशहाली , उन्नति, समृद्धि को लेकर आज हनुमान जी का पूजन व पाठ किया।
कमलनाथ ने मीडिया को बताया कि हम राम मंदिर निर्माण का स्वागत करते है।राजीव गांधी जी ने तो 1985 में इसकी शुरुआत की थी और 1989 में शिलान्यास किया था | आज उन्ही के कारण ही राम मंदिर का सपना साकार हो रहा है। हम राम मंदिर निर्माण के लिये प्रदेश की जनता की और से 11 चाँदी की शीला भेज रहे है। यहाँ भी भी वे सियासत करने से नहीं चूके कहने लगे कि हम जब भी कुछ करते है , भाजपा के पेट में दर्द पता नहीं क्यों चालू हो जाता है।क्या धर्म पर उनका पेटेंट है , उनका ठेका है , उन्होंने धर्म की एजेंसी ली हुई है क्या ? हम धर्म का उपयोग राजनीति के लिये नहीं करते है , हम इसे इवेंट नहीं बनाते है। हम धर्म और राजनीति का गठजोड़ नहीं करते है। भाई वह क्या बात है कमलनाथ जी आपने तो एक ही आयोजन से कई सारे तीर चला डाले |
मध्यप्रदेश के विधान सभा उप चुनाव को देखते हुए उनका यह सनातन धर्म प्रेम उनकी नजर में जायज ही कहा जा सकता है | पर उनके ही बड़े सहयोगी दिग्विजय जब राम मंदिर के नाम पर अशुभ मुहूर्त की बात सार्वजनिक करते हैं तो उनके किये कराये पर पानी फिर जाता है | दिग्विजय जैसे कई लोग हैं इस देश में जिन्हे यह बात हजम नहीं हो रही की राम मंदिर बनेगा , वह भी सर्वोच्च न्यायलय के आदेश से | न्यायालय में राम मंदिर की सुनवाई रोकने का जतन करने वाले , राम को काल्पनिक बताने वाले , राम सेतु के अस्तित्व को नकारने वाले लोग भी हैं | और ये किसी दूसरे दल में नहीं बल्कि कमलनाथ जी जिस पार्टी के हैं उसी दल में वे भी हैं , पर कमलनाथ के पेट उनके बयानों को लेकर कभी दर्द नहीं हुआ | दरअसल राम मंदिर निर्माण से कई लोगों का सियासी मुहूर्त बिगड़ रहा है जिसको लेकर बेचारे परेशान हैं l
