नई दिल्ली। कई बार इलाज में लापरवाही की वजह से किसी की जान पर बन आती है। ऐसे ही एक मामले में दिल्ली स्टेट कंज्यूमर रिड्रेसेल कमीशन ने दिल्ली के बत्रा अस्पताल को एक पीड़ित मरीज के परिवार वालों को दस लाख रूपए का मुआवजा देने का फैसला सुनाया है।
शिकायतकर्ता दिलीप कुमार बेजबरूआ, जोकि असम की एक रिफाइनरी में बतौर डीजीएम काम करते थे। एक दिन उनकी दिल की धड़कन ज्यादा बढ़ गई। ऐसे में उन्होंने एक स्थानीय डॉक्टर को दिखाया उन्होंने दिलीप कुमार को दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल और मेडिकल रिसर्च सेंटर में एक टेस्ट कराने की सलाह दी। इसके बाद वो इलाज के लिए दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने बत्रा हॉस्पिटल में दिल की इलेक्ट्रो फिजियोलॉजी स्टडी कराई।
दिल में आई गड़बड़ी को ठीक करने के लिए डॉक्टरों की टीम ने इलाज शुरू किया, मगर ये बताए बिना कि जिस मशीन से उनके दिल का परीक्षण किया जा रहा है, उससे ब्लॉकेज का खतरा भी है। जरा सी लापरवाही की वजह से मरीज को ओपन हार्ट सर्जरी करानी पड़ गई और स्थायी तौर पर पेसमेकर लगाना पड़ गया।
इसी लापरवाही के खिलाफ पीड़ित ने कंज्यूमर रिड्रेसेल कमीशन की शऱण ली थी। जिसने अस्पताल को ये निर्देश दिए हैं कि वो पीड़ित मरीज को मुआवजे के तौर पर दस लाख रुपए दे।
इस मामले में बत्रा हॉस्पिटल प्रबंधन ने कोर्ट में सफाई दी है कि मरीज को पहले ही इलाज की जानकारी दे गई थी। इसके लिए मरीज ने सहमति पत्र भी साइन किया था। मगर कोर्ट ने इसे नाकाफी माना।
