सैयद ख़ालिद कैस -8770806210
भोपाल । सूचना का अधिकार अधिनियम के द्वारा मोदी सरकार में हुऐ भ्रष्टाचार के उजागर होने के बाद से ही केन्द्र सरकार ने आरटीआई को कमज़ोर करने के लिए कई प्रयास किये । सरकार द्वारा किये गए संशोधनों के बाद आरटीआई क़ानून को पंगु बनाकर रख दिया गया । केन्द्रीय सूचना आयोग जो पहले स्वतंत्र होकर निष्पक्ष रूप से काम करता था उसे सरकार की निगरानी में करने के बाद अब गृह मन्त्री यह कह रहे हैँ कि आरटीआई आवेदनों की कमी सरकार के संतोषजनक कार्यो का परिणाम है , जबकि वास्तविकता यह है कि आरटीआई कानून की आत्मा को चोटिल किया जा चुका है , यही कारण है कि आवेदनों में कमी आई । आवेदनों के निराकरण नही होने से आई हताशा सहित आरटीआई कार्यकर्ताओ पर हुऐ प्राणघातक हमलों , हत्या , हत्या के प्रयास और झूठी मुकदमेबाजी के परिणामस्वरूप आरटीआई आवेदनों में कमी को अमित शाह अपनी सरकार की उपलब्धि बता रहे हैँ ।
गौरतलब हो कि दिल्ली में सेंट्रल इंफार्मेशन कमिशन (CIC) के 14वें वार्षिक कंवेंशन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि जितना संभव हो सके उतनी जानकारियां पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराई जाएं ताकि RTI आवेदनों की संख्या में कमी आए।
सरकार की सफलता अधिक आरटीआई आवेदनों में नहीं है। उन्होंने कहा,’ RTI आवेदनों में कमी आने का मतलब है कि सरकार का काम संतोषजनक है।’
गृहमंत्री ने कहा, ‘हम ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जहां लोगों को RTI का आवेदन करने की जरूरत न महसूस हो। इवेंट में मुख्य अतिथि के तौर पर गृहमंत्री थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि बगैर आरटीआई आवेदन किए जारी योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी हासिल हो सके।
डैशबोर्ड के जरिए हमने एक नए पारदर्शी युग की शुरुआत की।’ उन्होंने आगे बताया कि इसका इस्तेमाल कर यह देखा जा सकता है कि कितने शौचालयों का निर्माण किया गया है। साथ ही इसके जरिए सौभाग्य योजना के तहत इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन को देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘अशिक्षित महिला भी डैशबोर्ड के जरिए यह पता कर सकती है कि उसे कुकिंग गैस सिलिंडर कब मिलेगा। सरकार ने प्रशासनिक कामों को इतना पारदर्शी बना दियाा है कि RTI आवेदनों की जरूरतें ही कम गईं हैं। CIC से मेरा आग्रह है कि वे लोगों को इस बात की जानकारी दें कि जिसे अपनाने के बाद हमें आरटीआई आवेदन करने की जरूरत ही न पड़े।’ अमित शाह ने कहा कि RTI कानून का मुख्य लक्ष्य व्यवस्था में लोगों के बीच विश्वास बनाना है।
उल्लेखनीय है कि ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 14 सालों में कुल 3.02 करोड़ लोगों ने इसका इस्तेमाल किया। भारत में वर्ष 2005 में यह एक्ट लाया गया था।
