पत्रकारों से ज़्यादा सेक्स वर्कर्स को प्राथमिकता देती शिवराज सरकार
भोपाल। प्रदेश में कोरोना काल मे जिस प्रकार फ्रंट लाइन वर्कर की हैसियत से जिस मुस्तेदी से पत्रकारों ने विशेषकर गैर अधिमान्य पत्रकारों ने अपने दायित्वों का निर्वहन किया वह किसी से छिपा नही है। शिवराज सरकार द्वारा भारी विरोध के बावजूद केवल गैर अधिमान्य पत्रकारो और उनके परिजनों को उपचार की( कोरी व्यवस्था )घोषणा की परन्तु इस घोषणा से कितने पत्रकार लाभान्वित हुए इसका कोई ज्ञान नही ।
शिवराज सरकार द्वारा इतने विरोध के बावजूद अब तक गैर अधिमान्य पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित नही करना भी चिंतनीय रहा। इसी बीच आज शिवराज सरकार द्वारा एक विवादित आदेश जारी किया जिसका खुलकर विरोध हो रहा।
दरअसल आज प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने प्रदेश के समस्त कलेक्टर्स के लिए हाई रिस्क वाले कुछ समूह चिन्हित कर टीकाकरण में प्राथमिकता के निर्देश दिए हैं।जिनमें अन्य वर्गों के अलावा विशेष तौर पर सेक्स वर्करों का भी ज़िक्र किया गया है।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि उक्त आदेश में फील्ड में रहकर कवरेज करने वाले पत्रकारों का कोई उल्लेख नही होना चिन्तनीय है। जबकि इस कोरोना काल मे प्रदेश भर के कई पत्रकारों ने अपनी दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी शहादत दी है।जिसे प्रदेश सरकार द्वारा नज़र अंदाज़ करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
गौरतलब है कि पूरे कोरोना काल मे पत्रकारों विशेषकर गैर अधिमान्य पत्रकारों द्वारा फ्रंट लाइन वर्कर की भांति अपनी भूमिका निभाई उसके विपरीत सरकार द्वारा उनकी सेवाओ का सम्मान नही कर उनको न तो लाभान्वित किया और न ही उनके या उनके परिवार के लिए कोई ठोस कदम उठाया।

प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान द्वारा जारी आदेश में प्रदेश के समस्त कलेक्टर्स के लिए हाई रिस्क वाले कुछ समूह चिन्हित कर टीकाकरण में प्राथमिकता में पत्रकारों को स्थान न देकर सेक्स वर्कर्स को प्राथमिकता देना कुठाराघात से कम नही है।
प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद ख़ालिद क़ैस ने एक प्रेस नोट में कहा कि आज हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार के द्वारा हाई रिस्क वाले समूह चिन्हित कर टीकाकरण में पत्रकारों को प्राथमिकता नही देकर सेक्स वर्कर्स को पत्रकारों के साथ कुठाराघात किया है।
