मप्र छग विशेष संवाददाता:-खेमराज चौरसिया,(आरटीआई कार्यकर्ता)@9893998100
छतरपुर -जिले का महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र और गॉव महाराजपुर एक एेेंेंसा गॉव जहां पर मूलत: देशी पान के लिए जाना जाता है और सभी वर्गो के अलावा चौरसिया जाति की अधिकता है और पान की खेती ही मुख्य व्यवसाय रहा है। देशी पान की खेती सरकार की अनदेखी और प्राकृतिक सम्पदा अब खत्म होने की कगार पर है। राजनीतिक अगर बात की जाए तो यहाँ बीजेपी का गढ़ भी रहा है। जिससे कुछ लोगों का मानना है कॉंग्रेस सरकार में यह गॉव विकास के लिए हमेशा ही पिछड़ रहा पर आज भी पिछले चार साल से नगरपालिका से लेकर केन्द्र सरकार ताक में बीजेेपी है पर विकास का पैमाना सबसे निचले पायदान पर भ्रष्टाचार सभी कार्यालयो में चरम सीमा पार कर चुका है। राजनीतिक लोगों की बात की जाये तो जनसंंघ के सात संस्थापक सदस्यों मैं से एक नेता स्व. दादा मातादीन चौरसिया,जी इसी गॉव से रहे है।
कुछ पुराने लोगों की मानो तो भारत के गृह मंत्री रहे श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को भी महाराजपुर आगमन पर लोगोंं का इतना जन विरोध झेलना पड़ा था की जनसंंघ नेता स्वण्ञ दादा मातादीन चौरसिया के यहां पैदल जाना पडा था और दादा मातादीन चौरसिया से कॉंग्रेस की सभा मे लोगो के हंगामे की बताई और सभा के लिये उन्हें ही बुलाया उसके आने के बाद ही शास्त्री जी सभा मे आये और लोगों से शास्त्री जी की बात सुनने के लिए लोगोंं से आग्रह किया तब जाके शास्त्री जी की जन सभा समापन हुई। महाराजपुर के नेता की लोकप्रियता देखते ही शास्त्री जी ने दादा मातादीन चौरसिया से कॉंग्रेस में आने का ऑफर दिया था जिसमें दादा मातादीन चौरसिया ने यह कह कर बात खत्म कर दी थी कि अगर में भी कॉंग्रेस मैं आ जाऊंंगा तो विपक्ष मैं शास्त्री जी आप का विरोध कौन करेगा
यह था विकास
- 1939 में स्थापित म्युनिसपलटी
- 1942 मैं स्थापित नेहरू हायर सेकेंडरी स्कूल.
- 1942 मैं स्थापित बडा अस्पताल
- 1964 में स्थापित छत्रसाल महाराजा महा विद्यालय*
बीजेेपी के पेटेन्ट विधायक और पूर्व गृहराज्य मंत्री वर्तमान नगरपालिका अध्यक्ष रामदयाल अहिरवार इसी गाँव के है।
रामदयाल अहिरवार एवं उनके पुत्र के नगरपालिका चुनाव प्रचार में भी शिवराज सिंह जानता से वोट मॉंग चुके है पर फिर भी नेताओं के अलावा अन्य शायद ही किसी का विकास हुआ हो
महााराजपुर मैं आज क्या है
- 1942 मैं स्थापित बडा अस्पताल जो की आज प्राथमिक स्वस्थ्ा केन्द्र है। जिसकी जमीन पर नगरपालिका ने ही कब्जा कर लिया
- जिसकी हालात का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महिलाओं के पोस्टमार्टम भी पुरुष डॉक्टर ही करता है
- डिग्री कॉलेज मैं अधिकतर सबजेक्ट के प्रोफेसर ही नही है
- नेहरू हायर सेकेंडरी में मास्टर जी आते तो है पर किसी का मुख्यालय में निवास ही नही
- नगरपालिका में अधिकांश कर्मचारी स्थानीय है जिसमें से जो पहले चौकीदार थे वो आज साहब है। कुछ की तो पूरी की पूरी नाैैकरी का समय मैं भी ट्रांंसफर नही हुए और अनुकंपा के भोगी है।
- तहसील तो महाराजपुर में है पर अधुरी न एसडीएम कार्यालय न रजिस्ट्र्रार है और न जेल है
- सबसे बढ़ा रोग मुख्यालय पर 5%से 10 ही कर्मचारी रूकते हैंं बाकी सब भाग जाते हैं
- पान की ख़तम हो रही खेती से जहां क्षेत्र में दुसरो को रोजगार इस गॉव से मिलता था आज पान किसान ने या तो पान की खेती छोड़ दी या गॉव छोड़ दिया
- मध्यप्रदेश सरकार के दो कानुन इसी पान फूल के रकबे पर अफीम के पट्टे कुछ जिलों मैं मिलते है और इसी रक़वे के किसानों को खेती ही छोड़ने को मजबूर हैं महराजपुर के विकास का आंंकलन कर के ही गॉव क्षेत्र की जनता देगी आशिर्वाद महाराजपुर से ही उठी थी मेडिकल कॉलेज की आवाज जो शिवराज सरकार को सुनाई भी तक नही दी है।
महाराजपुर की जन आर्शिवाद यात्रा शिवराज सिंह के लिये सिरदर्द हो सकती है उनको चुनौती का अहसास भी शायद लग गया है सूत्र बताते हैै कि जहा महाराजपुर में एक रात विश्राम का प्रोग्राम था उसे अब कुल एक घंटे में सिमट गया और सभा स्थलों को छोटी फील्ड की जगह बसस्टैंड कर दिया है लोगों की सभा में उपस्थिती की नेताओं को चिन्ता सताा रही है…
छतरपुर//महाराजपुर संवाददाता:-खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता)
