खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता ) @9893998100
छतरपुर -रविवार 30 सितम्बर को मप्र राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता का आर्शीवाद लेने छतरपुर जिले में आ रहे हैं | उनके जिले में आगमन को लेकर लोगों में खाशा उत्साह इस बात को लेकर है कि वे छतरपुर में मेडिकल कालेज के आधार शिला रखेंगे और इसी के साथ वे जिला अस्पताल के नव निर्मित भवन का लोकार्पण भी करेंगे | मुख्य मंत्री की इन जन कलयाण कारी योजनाओं से लाभ लोगों को तभी मिलेगा जब इनके संचालन की जिम्मेदारी नेक नियत और संवैधानिक नियमो का पालन करने वाले अधिकारियों को सौंपी जायेगी |
मध्य प्रदेश सरकार का नियम है कि सिविल सर्जन और सी एम् एच ओ पद पर क्लास वन वरिष्ठ विशेषज्ञ को पदस्थ किया जाएगा | डॉ की वरिष्टता उसकी सेवा शुरू करने की तिथी से मानी जायेगी | पिछले कुछ वर्षो के दौरान छतरपुर जिला अस्पताल में सिविल सर्जन की पदस्थापना को लेकर शासन के अधिकारी सरकार के नियमो को धता बताते रहे हैं | सिविल सर्जन का पद ऐसे लोगों को सौंपा जाता रहा जो नियमतः उस पद के लिए वैध नहीं थे | असल में अस्पताल के नए भवन बनने के साथ ही सिविल सर्जन पद हथियाने की दौड़ शुरू हो गई थी | इसके पीछे मंशा यह थी की नए भवन के नाम पर जम कर बजट आएगा और खरीद फरोख्त के नाम पर करोडो के बारे न्यारे होंगे | ऐसी ही दौड़ में सफल रहे डॉ. आर पी पांडे , जिन्हे अपनी तथाकथित जुगाड़ के चलते फिर से सिविल सर्जन बना दिया गया |
जबकि जिला अस्पताल की वरिष्टता सूचि को देखा जाए तो वरिष्टता क्रम में डॉ सुषमा खरे , डॉ. एल सी चौरसिया , डॉ. वी पी शेषा , डॉ. राजेश खरे, डॉ लता चौरसिया जैसे डॉ आते हैं | पर इन सब वरिष्ठ चिकित्स्कों को दर किनार कर डॉ पांडे को यह दायित्व सौंपा गया जो सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक अमले की निति और नियति पर शक पैदा करता है
लूट का तंत्र-
रोगी कल्याण समिति रोजाना मरीजों से लगभग 25 हजार रु कमाती है | जिला अस्पताल को रोजाना होने वाली इस आय से मरीजों की सुख सुविधाओं को बेहतर करना चाहिए , पर जिला अस्पताल में इस पैसे का जम कर दुरूपयोग किया जा रहा है |
हाल ही में तीन कम्प्यूटर आपरेटर पदस्थ किये जाने की खबरे सामने आए रही हैं | संविदा आधार पर की गई इन नियुक्तियों में सरकार के निर्देश का जम कर उलंघन किया गया है | लेंन देन की कथा अलग से है |
बदहाल व्यवस्थाएं :-
जिला अस्पताल में डॉ का समय पर नहीं आना और समय के पहले चले जाना तो एक स्थाई नियति है | जिस अस्पताल का सिविल सर्जन ही मुख्यालय छोड़ नौगांव में अपना क्लीनिक चलाने में व्यस्त रहता हो उस अस्पताल में डॉ समय पर कैसे आएंगे | रही बात भर्ती होने वाले मरीजों की तो वे भगवान् भरोशे हैं | वार्डों में जानवरो का प्रवेश बगैर टिकिट और मरीजों के परिजनों के प्रवेश पर दस रु का टिकिट लगता है | प्रसूति कक्ष और बच्चा वार्ड की हालत देख कर अस्पताल प्रबंधन की काबलियत का निर्णय किया जा सकता है | जिस अस्पताल में रोजाना की २५ हजार की कमाई होती हो उस अस्पताल में टूटे पलंग , जमीन पर पड़े मरीज टूटे फूटे स्ट्रेचर , और स्ट्रेचरों का अभाव मन को कचोटता जरूर है |
सरकार आम जन की सुविधाओं के लिए मुफ्त दवाई बाँट रही है , प्रसूति के लिए वाहन उपलब्ध करा रही है | पर सरकार की सारी योजनाए तब धराशाई हो जाती हैं जब सरकार के बनाये नियमो का उनके ही अधिकारी माखौल उड़ाते हैं और ऐसे लोगों के हाथो में अस्पताल का प्रबंधन सौंप दिया जाता है |
मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान छतरपुर जिला अस्पताल के नए भवन के उदघाटन के साथ यहां कर्तव्यनिष्ट सिविल सर्जन , डॉक्टरों की और अस्पताल स्टाफ की पूर्ति में भी महत्व पूर्ण योगदान देंगे |
छतरपुर जिलाअस्पताल :
एक्सरे टेक्नीशियन करते हैं बाबू गिरी और बाबू जी करें इलाज
छतरपुर जिला अस्पताल इन दिनों राम भरोसे चल रहा है | जिला अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्थाओ का आलम ये है कि एक्सरे टेक्नीशियन से बाबू गिरी का काम लिया जा रहा है | जबकि दूसरी तरफ जिला अस्पातल में लोग एक्सरे कराने के लिए परेशान घूमते रहते हैं क्योंकि वहां स्टाफ की कमी हो जाती है | इसके दूसरे पहलू को देखा जाए तो जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो में एक्सरे मशीन कबाड़ बन रही हैं और वहां इनको चलाने वाला तकनिकी स्टाफ नहीं है |
जिला अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में एक्सरे टेक्निशयन के पद पर नियुक्त नितेन्द्र खरे पदस्थ हैं | पिछले सिविल सर्जन डॉ एस. के. चौरसिया से सांठ गाँठ करके इन्होने भण्डार और जन्म मृत्यु शाखा का काम करने का आदेश करा लिया था | जब की शासन के स्पष्ट निर्देश हैं की अस्पताल के किसी भी तकनिकी स्टाफ से अन्य कार्य नहीं लिया जाए | इसके पीछे शासन की मंशा साफ़ है कि तकनीक स्टाफ की अनुपलब्धता के कारण आम नागरिको को परेशान ना होना पड़े |
सिविल सर्जन के पद पर नव नियुक्त डॉ आर पी पांडेय दूसरी बार सिविल सर्जन का पद पाने में कामयाब रहे | कैसे पाया इसकी अपनी अलग कहानी है | डॉ पण्डे के सिविल सर्जन बनने के बाद जिला अस्पताल लिपिक वर्ग में यह उम्मीद जाग्रत हुई थी कि अब प्रशासनिक व्यावस्थाये सुधरेंगी | पर डॉ. पांडे ने भी पूर्व सिविल सर्जन डॉ चौरसिया द्वारा बनाई गई असंवैधानिक व्यवस्थाओ को बरकरार रखा गया | एक्सरे टेक्निशयन जैसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाले पद पर पदस्थ व्यक्ति से बाबू गिरी कराई जा रही है | इसके पीछे की जो मुख्य वजह बताई जा रही है वह पैसो के लेनदेन से जुडी है |
