भोपाल. अब गुमशुदा बच्चों की तलाशी का काम जांच अधिकारियों की मनमानी पर निर्भर नहीं रहेगा। अपहरण की में दर्ज होने वाले एेसे मामलों में डीआईजी ग्रामीण ने ५२ बिंदुओं की जांच की प्रक्रिया तय करके पालन के निर्देश दिए। एक महीने में ही इसके नतीजे भी सामने आने लगे। भोपाल रेंज में बच्चों की बरामदगी का आंकड़ा सुधरने पर पुलिस मुख्यालय ने भी इस
एसओपी (स्टेंडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर ) का चार्ट मांगा है जिसे भविष्य में अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।
डीआईजी रूरल केबी शर्मा ने भोपाल रेंज के सीहोर, विदिशा और राजगढ़ की समीक्षा के दौरान देखा कि बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में कोई जांच अधिकारी सात-आठ बिंदुओं पर जांच कर रहा है तो कोई जांच अधिकारी दो-तीन बिंदु जांचकर ही काम चला रहा है। बच्चों के अपहरण के गंभीर मामले की जांच को लेकर गंभीरता न मिलने पर शर्मा ने महत्वपूर्ण प्रकरणों के अध्ययन के साथ अपने अनुभव के आधार पर ५२ बिंदुओं की एक चेकलिस्ट बनाकर जारी की। नाबालिगों की गुमशुदगी के सभी प्रकरणों में इन बिंदुओं पर जांच करना तय करते ही एक ही महीने में इसके रिजल्ट भी दिखने लगे।
यह है जांच के बिंदु
बच्चों की गुमशुदगी/ अपहरण के मामलों में कोई संदेही सामने न होने पर उसके परिवार के सदस्यों की पूरी जानकारी, आर्थिक स्थिति, माता-पिता पक्ष सहित सभी रिश्तेदारों के नाम, पते, मोबाइल नम्बर, घर आने-जाने वालों की जानकारी सहित गायब होने वाले बच्चे का लगाव किससे था, उसकी रूचि किन विषयों में थी, उसने स्कूल की कॉपी किताबों में क्या लिखा है, उसके घर से गायब होने के पहले कौन सी बातें हुई अंतिम बार किसके साथ देखा गया या देखी गई सहित कुल ३२ बिंदुओं की जानकारी लेकर जांच करना अनिवार्य किया। इसी तरह संदेही के ज्ञात होने की स्थिति में उसका पूरा विवरण, काम-पता सहित मोबाइल नम्बर की सीडीआर एवं आईएमईआई सर्च प्राप्त करने जैसे २० बिंदु शामिल किए। ५२ बिंदुओं पर जांच करते ही रेंज में गुमशुदगी के कुल मामलों में बरामदगी का जो आंकड़ा ३० फीसदी के पास था वह सीधे बढ़कर लगभग ४२ फीसदी तक पहुंच गया।
जिला कुल गुमशुदगी प्रकरण बरामदगी
विदिशा- २२५ ७७
सीहोर १२८ ४७
राजगढ़ १२५ ७३
कुल ४७८ १९७
‘बच्चों की गुमशुदगी गंभीर समस्या है, लेकिन
