भारत में अब दक्षिण एशिया से बाहर की महिलाओं को लाकर देह व्यापार में धकेला जा रहा है. विडंबना यह है कि ये महिलाएं शोषण और उत्पीड़न से बचाए जाने के बावजूद कानूनी पचड़ों में फंसी रहती हैं और जल्द अपने देश नहीं लौट पातीं.
भारत में लंबे समय से बांग्लादेश और नेपाल से लाकर महिलाओं से देह व्यापार कराया जाता रहा है. नेपाल के अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर भारत के अधिकारी मिल कर काम कर रहे हैं जबकि बांग्लादेश के साथ भारत का रिपैट्रिएशन समझौता है जिसके तहत वहां के नागरिकों के वापस उनके देश भेजने का प्रावधान है. लेकिन अब दक्षिण एशिया से बाहर के देशों की महिलाओं को भी तस्करी के जरिए भारत लाया जा रहा है. इनमें खास तौर से थाईलैंड और उज्बेकिस्तान की महिलाएं शामिल हैं.
तेलंगाना में राचकोंडा जिले के पुलिस प्रमुख महेश भगवत कहते हैं, “बांग्लादेश और नेपाल के साथ (रिपैट्रिएशन) प्रक्रिया ठीक तरह से काम करती है. लेकिन अब ऐसे देशों से भी लोगों को लाया जा रहा है जिनके साथ हमारी रिपैट्रिएशन संधि नहीं है.” सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2016 में बांग्लादेश से महिलाओं को तस्करी के जरिए भारत लाने के 33 मामले दर्ज किए गए जबकि 16 महिलाओं को नेपाल से लाया गया. उसी साल पुलिस ने थाईलैंड और उज्बेकिस्तान से होने वाली महिलाओं की तस्करी के भी 70 मामले दर्ज किए.
इससे पहले की रिपोर्टों में देह व्यापार पीड़ितों की राष्ट्रीयता के बारे में उल्लेख नहीं था. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के एक अधिकारी का कहना है कि थाईलैंड और उज्बेकिस्तान के नाम का उल्लेखन इसलिए किया गया है क्योंकि 2016 में तस्करी के ज्यादातर मामले इन्हीं दो देशों से सामने आए हैं.
