नई दिल्ली –बुजुर्ग माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी अब तक सिर्फ जैविक बेटे-बेटी या दत्तक बच्चों की होती है, लेकिन सरकार इसका दायरा बढ़ाकर इसमें बहू, दामाद और पोते-पोतियों को भी शामिल करने जा रही है। सरकार ने संपत्ति के लालच में माता-पिता को अपने पास रखने और फिर प्रॉपर्टी अपने नाम करके उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देने वालों पर कार्रवाई की भी योजना तैयार की है। ऐसे लोगों को शिकायत पर माता-पिता की संपत्ति वापस करनी होगी।
ये नियम माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख व उनके कल्याण से जुड़े 2007 के कानून में किए जा रहे संशोधन के हिस्से हैं। केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने इस कानून में बदलाव का मसौदा तैयार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों मंत्रालय ने राज्यों से इस प्रस्तावित बिल पर राय मांगी है।
भोपाल में नियम बनने से पूर्व हो गया अमल
माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख व उनके कल्याण से जुड़े 2007 के कानून में बदलाव का मसौदा अभी कानून का रूप नही ले पाया परन्तू मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के गोविन्दपुरा एसडीएम ने विगत दिनों एक विधवा पुत्रवधू को अपने सास ससूर को भरण पोषण हेतू रूपये 5000/ देने के आदेश किये हैं जो संभवत भारत वर्ष में अबतक का पहला आदेश होगा
