हर साल 23 जनवरी का दिन मेरे लिए बहुत खास होता है। वर्षों पहले इसी दिन मैंने एक लाइब्रेरी शुरू की थी जिसे बहुत कठिनाई के साथ चलाया और जिंदा रखा। हर साल उसके सम्मान में एक दीया जरूर जलाता हूं क्योंकि यह अंधेरे पर रोशनी की जीत का प्रतीक है।
जब मैंने लाइब्रेरी शुरू की तो कई देशों के दूतावासों और प्रकाशकों को चिट्ठी लिखी कि अपने साहित्य व संस्कृति की जानकारी देने वाली किताबों के बारे में बताइए। चिट्ठी लिखने के दूसरे ही हफ्ते मेरे पास दो बड़े लिफाफे आए। एक ही दिन, एक ही समय पर। एक चीन से था और दूसरा जापान से।
उनमें इतिहास, भूगोल और संस्कृति संबंधी कई रोचक बातें थीं जो मुझे बहुत अच्छी लगीं। इन दोनों देशों के इतिहास में मैंने पाया कि इन्होंने बहुत दुखा भोगा है और अपनी मेहनत से आगे बढ़े हैं। ये भूतकाल की घटनाओं को दोष नहीं देते रहते। चीन तो बहुत गरीब था और दूसरे महायुद्ध में चीनी लोगों पर भयंकर अत्याचार हुए। आज वह महाशक्ति है। वहां लोग उन दिनों को याद करते हैं लेकिन यह कभी नहीं कहते कि वे दिन आज उनकी तरक्की में रुकावट हैं।
इसी प्रकार जापान हिरोशिमा व नागासाकी पर बम हमले के बाद राख का ढेर बन चुका था। सिर्फ दो दशक बाद ही वह तरक्की की राह पर दोबारा दौड़ने लगा। वहां कोई राजनेता या धर्मगुरु नौजवानों को यह नहीं सिखाता कि हमें उन दो बम हमलों का अमेरिका से बदला लेना है, कभी नहीं। उन्होंने बुरा दौर देखा, सबक लिया और अपनी हिम्मत से दोबारा खड़े होकर दौड़ने लगे। उन्होंने भूतकाल को वर्तमान पर हावी नहीं होने दिया।
मेरी लाइब्रेरी के लिए चीन व जापान के बाद और भी कई संस्थाओं से किताबें—पत्रिकाएं आईं। उनमें दो तरह की पत्रिकाओं ने मेरा ध्यान खींचा। इन्हें आप दो विचारधाराएं समझें। पहली विचारधारा सदियों पुराने वैदिक ज्ञान का जिक्र करती है। मैं उसका हृदय से सम्मान करता हूं। उनकी खासियत थी कि वे प्राचीन काल के ऋषियों, गणितज्ञों, वैज्ञानिकों की खूब प्रशंसा करते। वे प्रशंसा के हकदार भी हैं। उसके बाद वे इतिहास के उस दौर में आते जब भारत में मुगल बादशाहों का शासन था। वे उन्हें कोसते और जी भरकर कोसते। वे उन्हें कोसते ही जाते। उनका मानना है कि आज भारत इसीलिए तरक्की नहीं कर रहा क्योंकि मुगलों ने यहां राज किया था।
एक दिन मैंने उस पत्रिका के संपादक को चिट्ठी लिखी कि श्रीमान्, नींद से जागिए .. मुगलों का शासन खत्म हुए तो डेढ़ सौ साल से ज्यादा हो गए। क्या आज वे आपका हाथ पकड़ रहे हैं कि तरक्की न करें? रिश्वतें खाएं हम और दोष मढ़ें अकबर के सिर! चोरी करें हम और गुनहगार बताएं शाहजहां को! मुगलों में अच्छाइयां—बुराइयां रही होंगी, मैं उससे इनकार नहीं कर रहा, लेकिन आज तो हमारा शासन है। क्या मुगल बादशाह आपके सपने में आकर कह रहे हैं कि तरक्की न करो? यह हमारी नीयत का पिछड़ापन है कि सैकड़ों साल पहले मर चुके लोगों के माथे दोष मढ़ दो और खुद हाथ पर हाथ धरे बैठे रहो। अगर आज हम पिछड़े हैं तो इसके लिए न ब्रिटिश जिम्मेदार हैं और न मुगल, इसके लिए सिर्फ हम जिम्मेदार हैं। अगर हमारी नीयत में खोट खत्म हो तो यह मुल्क आगे बढ़े। कृपया आइंदा से सैकड़ों साल पहले परलोक सिधार चुके लोगों को दोषी ठहराना बंद कीजिए और हो सके तो चीन व जापान का इतिहास पढ़िए।
मेरे पास उस पत्रिका के संपादक का कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद मैंने एक और प्रकाशक को चिट्ठी लिखी। उनकी खासियत है कि वे इस्लाम की बहुत अच्छी बातें बताते हैं, पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) की शिक्षाओं का वर्णन करते हैं। मैं इन दोनों बातों की बहुत इज्जत करता हूं। उसके बाद वे अपने असल मकसद पर आ जाते हैं। आग उगलते उनके लेख बताते हैं कि भारत में मुसलमान इसलिए पिछड़ा है क्योंकि यहां मोदी की हुकूमत है!
एक दिन मैंने उनके नाम प्यारी—सी चिट्ठी लिखी कि जनाब, आप सच फरमा रहे हैं। मुल्क में मुसलमान इसीलिए तो पिछड़ा है क्योंकि यहां मोदी की हुकूमत है! वरना उससे पहले तो यहां का हर मुसलमान हीरे—मोतियों में खेला करता था! हर मुसलमान के दरवाजे पर हाथी बंधा रहता था। उसके पास अंगूर के बड़े—बड़े बाग थे। बस 2014 में मोदी हुकूमत आ गई और वह उसकी करोड़ों की जायदाद ले गई। क्यों यही बात है ना?
जनाब, सच लिखिए। इस मुल्क का मुसलमान तो सात सौ साल पहले भी गरीब था। क्या उसके लिए आप मोदी हुकूमत को कसूरवार ठहराएंगे? माना कि सियासी झगड़े अपनी जगह हैं। आप मोदी को वोट मत दीजिए, उन्हें मत पसंद कीजिए पर लोगों में यह गलतफहमी मत फैलाइए कि कोई एक व्यक्ति या हुकूमत उसके पिछड़ेपन की वजह है। मोदी सरकार द्वारा बनाया गया कोई एक कानून बता दीजिए जो मुसलमानों को तरक्की करने से रोक रहा है। भारत का कोई एक कानून बता दीजिए जो मुसलमानों से कह रहा है कि तुम बड़े कारोबारी, बड़े वैज्ञानिक और बड़े विद्वान नहीं बन सकते।
माना कि मेरे मुल्क में कुछ खराब लोग हैं जो मुसलमान के बारे में गलत राय रखते हैं, लेकिन क्या वे ही पूरे हिंदुस्तान की नुमाइंदगी करते हैं? इस देश का आम हिंदू किसी भी किस्म की ज्यादती का कभी समर्थन नहीं करता। वह मुसलमानों के साथ खड़ा है। कुछ सिरफिरे लोगों को आप हिंदू समाज का मिजाज मत समझिए।
इस मुल्क का मुसलमान पढ़ाई—लिखाई करे, भविष्य की योजना बनाकर सही दिशा में मेहनत करे, कारोबार करे तो कौनसा कानून उसकी राह में रोड़ा अटका रहा है? कोई एक बता दीजिए। वह डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर, शिक्षक, फौजी जनरल और सबकुछ बन सकता है जो देश का दूसरा कोई शख्स बनना चाहे। किसी को कोसना बहुत आसान है लेकिन खुद में सुधार के लिए हिम्मत चाहिए। कमी हमारे अंदर है जो मजबूती से खड़े नहीं होते।
आप किसी विचारधारा से विरोध रखें और उसे जारी रखें, लेकिन कृपया यह कहकर नौजवानों की हिम्मत मत तोड़िए, उन्हें गुमराह मत कीजिए कि आप उस शख्स की हुकूमत की वजह से पीछे रह गए। आप इसलिए पीछे रह गए क्योंकि बहुत देर से जागे। वरना हर रोज़ ‘हय्या अलल फ़लह’ (आओ सफलता की ओर) का आह्वान सुनने वालों की ये हालत हो जाए! मुझे तो घोर आश्चर्य होता है।
मोदी हुकूमत आज है, कल नहीं होगी तो मैं दोबारा आप ही से मुसलमानों की ओर से सवाल करूंगा — क्या अब मुसलमान अरबों—खरबों की जायदाद का मालिक हो जाएगा? मैं जानता हूं, वो तब भी गरीब रहेगा। मैं तो चाहता हूं कि इस मुल्क का मुसलमान पूरी दुनिया से ज्यादा दौलतमंद, इज्जतदार, रुतबेदार हो लेकिन इनके नौजवानों को कोई यह तो समझाए कि यह तभी हासिल होगा जब मन लगाकर पढ़ाई करोगे और आगे बढ़ने के लिए मजबूत इरादा कर लोगे। और कोई रास्ता ही नहीं है।
यह मुसलमानों का दुर्भाग्य है कि उसे यह बताने वाले तो बहुत मिल गए कि तुम पिछड़ रहे हो लेकिन यह बताने वाले बहुत कम मिले कि इसकी वजह क्या है। जनाब, बीती बातों पर आंसू बहाने से कुछ नहीं होगा। आइए, किताबें पढ़ें, मेहनत करें, भविष्य के लिए विचार करें, कुछ नया सोचें, अच्छा सोचें, वक्त की कद्र करें, क्योंकि हमारे लिए तो इबादत के बुलावे में भी सफलता का न्यौता है। इसके मायने क्या हैं? जरा सोचो।
