भोपाल। पूर्व केन्द्रीय मन्त्री , सासंद और देश के कद्दावर नेता कमलना तथा युवा तुर्क हरदिल अज़ीज़ पूर्व केन्द्रीय मन्त्री , सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों प्रदेश कॉंग्रेस की कमान आने के बाद वर्षों से मुर्दा मप्र कॉंग्रेस मैं न सिर्फ़ जान आई वरन 2018 के विधानसभा चुनाव के लिये कमर तोड़ महनत नज़र आने लगी । कमलनाथ जी जैसे अनुभवी हाथों मैं कॉंग्रेस के आते ही कॉंग्रेस का विकास और सत्ता की आस दिखने लगी हैं । पर कुछ हैं जो मप्र कॉंग्रेस को कमज़ोर कर रहा है और जिसको नज़र अंदाज नही किया जा सकता ।
कल अखिल भारतीय कॉंग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत जी ने मप्र की चुनाव समीति घोषित की ।जारी सूची में प्रदेश के महारथियों एवं वरिष्ठ महानुभाव के अलावा पिछड़ा वर्ग , अल्पसंख्यक , किसान तथा अनुसूचित जाति विभाग के मुखियाओं को शामिल किया , परंतु विधि एवं मानव अधिकार सहित सूचना अधिकार विभाग के मुखियाओं को शामिल नही करना यह साबित करता है कि इनकी कोई वक़्त नही या यह लोग अयोग्य थे ?
अब यह तो कॉंग्रेस मुखिया या हाई कमान जाने !
यहाँ यह गौर करनें वाली बात है की विधि , मानव अधिकार सहित सूचना अधिकार विभाग के राष्ट्रीय मुखिया मप्र से ही हैं , उनके द्वारा मप्र की कमान वरिष्टम अधिवक्ता को सौंपी गई जो कभी उनके जूनियर रहे । परन्तु यहाँ एक बात जो महत्वपूर्ण है वह है कि वरिष्ठम महोदय का कोई जनाधार नही है , बेशक वह प्रदेश के वरिष्ठम अधिवक्ता है कॉंग्रेस के विधि सलाहकार है , परन्तु नेता नही है । फलस्वरूप कुछ मुठ्ठी भर के हाथों उनके मकड़जाल मे फंसने के कारण वह संगठन का न तो विस्तार कर पा रहे और न उसे मुख्य धारा से जोड़ पा रहे । जबकि इनसे पूर्व के मुखिया विजय कुमार चौधरी के नाम की प्रदेश भर मैं तूती बोलती थी , उनकी प्रदेश भर में पकड़ और लोकप्रियता का परिणाम था कि सम्पूर्ण मप्र प्रदेश में विधि एवं मानव अधिकार विभाग का अपना वजूद था , जो अब नदारद है । कल चुनाव समिति में शामिल नही करना उसका प्रमाण है ।
खैर ! कॉंग्रेस को भाजपा के विधि विभाग से नसीहत लेना होंगी एक जूनियर सम्पूर्ण मप्र में विधि विभाग का डंका पीट रहा है और कॉंग्रेस विधि विभाग सो रहा है ।
भोपाल से सैयद ख़ालिद कैस , समुह सम्पादक एवं राजनैतिक विश्लेषक खबरें आजतक 9009217595,8770806210
