बृजेश खंडेलवाल की रिपोर्ट।
गाँव के अधिकारी, कर्मचारियों ने लिया निर्णय गाँव की संस्कृति को बनाये रखने वाले का सम्मान होना चाहिए
आम्बुआ :- आगामी 09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर गाँव के युवाओं ने की अपने गाँव के लिए अनुठी पहल। आंगनवाड़ी से कक्षा 8 वी तक के विद्यार्थियों को वितरित किया जायेगा बेसिक शिक्षा की पाठ्यपुस्तके एव अन्य आवश्यक वस्तुऐ।
वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर कोविड -19 कोरोना ने पूरे विश्व को अपने जाल में जकड़ा हुवा है। आम जनता से लेकर विश्व की प्रसिद्ध वैज्ञानिक सँस्थाये एव डब्ल्यु एच ओ भी कोरोना को लेकर चिंतित है। ऐसे में आम जनता को रोजी-रोटी एव गरीब परिवारो को मूलभूत आवश्यकताऐ रोटी, कपड़ा और मकान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। संपूर्ण शैक्षणिक सँस्थाऐ बन्द है , ऐसी विकट परिस्थितियों में सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पढ़ाई की मुख्यधारा से जोड़कर रखना एक बड़ी चुनौती है विशेष कर जिन विद्यार्थियों के पालक अशिक्षित है वहाँ यह स्थति ओर भी भयावह है। ऐसे में ग्राम अड़वाड़ा के युवाओं ने एक कदम गाँव की ओर श्लोगन पर चलकर अपने छोटे -छोटे भाई – बहनों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए बैठक आयोजित कर विचार मंथन कर निर्णय लिया गया कि शिक्षा की डोर को संजोए रखने के लिए हमे हमारे साथियों को ही प्रेरीत करना चाहिए इस हेतु वर्ष 2019-20 की कक्षा 10th एव 12 वी में जिन छात्र -छात्राओ ने गांव में प्रथम , द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त किया है उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया ताकि उन्हें देख कर अन्य छात्रों में जिज्ञासा ओर प्रेरणा मिले इसलियें आदिवासी दिवस के अवसर पर ग्राम की प्रतिभा का चयन हो चुका है उन्हें सम्मानित किया जायेगा। साथी साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज एव कक्षा 8वी तक के सभी विद्यार्थियों को निशुल्क पहाड़ा पट्टी, पेन, पेन्शील, रबड़, सोपनर, स्केल सहित आदि आवश्यक सामग्री का वितरण ग्राम के अधिकारी, एव कर्मचारी के सहयोग से किया जाएगा।
गाँव की संपूर्ण जवाबदेही गाँव के पटेल, पुजारा, सरपंच एव गाँव चौकीदार की होती है इसलिए समिति ने निर्णय लिया हे की गाँव पंच एव गाँव के रिटायर्ड कर्मचारियों को भी सम्मानित करेंगे।एव गाँव मे हरियाली होगी तभी खुशहाली होगी इस श्लोगन को मूर्त रूप देने के लिए प्रत्येक परिवार को पौधे भेंट किये जायेंगे और उनकी देख रेख एव प्रत्येक बच्चे को स्कूल भेजने का संकल्प दिलाया जायेगा इस कार्य को मूर्त देने के लिए वोलेंटियर्स के रूप में 150 युवाओं की फौज तैयार कर ली गई है जिनके लिए विशेष टीशर्ट बनवाई जा रही है साथी इन युवाओ को कोरोना काल मे सोशल डिस्टेंन एव आवश्यक उपाय हेतु प्रशिक्षित भी किया जा रहा है जो अपनी आदिवासी भाषा मे गाँव के हर आदमी तक सन्देश पहुँच सके।
