धार। ग्राम पंचायत, शाला प्रबंधन समिति, पालकगण व ग्रामवासियों ने प्राचार्य के तानाशाही पूर्ण रवैये के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। ग्रामवासियो व जनप्रतिनिधियो ने प्राचार्य की शिकायत मुख्यमंञी, विभागीय मंञी से लेकर जिला कलेक्टर, व इंदौर व भोपाल में आला अधिकारियों को भेजी है। तथा प्राचार्य को हटाने की मांग की गई है।
शाउमावि गुणावद की प्राचार्या अपने सेवाकाल में विवादों में रहने वाली, हिटलर शाही रवैया अपनाकर शिक्षकों को बार-बार निलंबित करवाये जाने की धमकी देने वाली और कहती है कि मैंने पूर्व में भी शिक्षकों को निलंबित करवाया है और गुणावद में भी शिक्षक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को निलंबित करवा चुकी हूँ। प्राचार्य के द्वारा संस्था में भय का वातावरण निर्मित किया गया है और शिक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार, अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। प्राचार्य के द्वारा शिक्षकों को छोटी-छोटी बात पर रोजाना स्पष्टीकरण देकर उनसे जबाब मांगती हैं। शिक्षकों का अधिकांश समय स्पष्टीकरण का जवाब लिखने और विभागीय जांच में कथन लिखने में बीत जाता है। शिक्षक मानसिक रूप से परेशान होकर संस्था में स्वस्थ्य मन से अध्यापन का कार्य नहीं करवा पाते हैं। जिससे शैक्षणिक कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
प्राचार्य मुख्यालय पर न रहते हुए इंदौर से आना जाना करती है। निर्धारित समय पर न आते हुए देर से आती है और इंदौर जाने की जल्दी रहती है। प्राचार्य का अधिकांश समय संस्था में दिनभर शिक्षकों के खिलाफ षड्यंत्र रचकर झूठी शिकायत लिखने और स्पष्टीकरण देने तथा शिकायतों के प्रति उत्तर लिखने में व्यतीत होता है। प्राचार्य के द्वारा संस्था के शिक्षकों पर जबरन धौस दबाव बनाकर पंचनामा व शिकायतों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जाता है जिससे आये दिन संस्था में विवाद की स्थिति निर्मित होती है विवाद होने पर पंचनामे को फाडना पड़ा। प्राचार्य के द्वारा जानबूझकर शिक्षकों को परेशान करने की नियत से अवकाश आवेदन होने के बाद भी अनुपस्थित लगाना तथा शिक्षक के प्रशिक्षण पर रहने के बाद भी अनुपस्थित लगा देना। इसी प्रकार एक शिक्षिका ने अवकाश आवेदन प्राचार्य के हाथ में रूबरू देने के बाद भी अनुपस्थित लगाना। प्राचार्य की हठधर्मिता को दर्शाता है। प्राचार्य का रूझान संस्था में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में नहीं है। आये दिन विवादों के कारण संस्था के समस्त शिक्षक मानसिक रूप तनाव में रहते हैं और स्वस्थ्य मन से अध्यापन का कार्य नहीं करवा पा रहे हैं। प्राचार्य का कार्य एवं व्यवहार संस्था के शिक्षक व बच्चों, पालकगण, शाला प्रबंधन समिति व ग्रामवासियो के साथ संतोषजनक नहीं है। प्राचार्य के तानाशाही रवैये के चलते संस्था के शिक्षक व जांचकर्ता अधिकारी भी परेशान रहे हैं।
क्या विभाग के आला अधिकारी ऐसे आदतन विवादास्पद प्राचार्य के विरूद्ध ठोस कदम उठाएंगे??
विवादास्पद प्राचार्य की चल रही है विभागीय जांचे
संभागीय कार्यालय द्वारा नियम विरुद्ध अवकाश, बगैर सूचना दिए अवकाश पर जाने के उपरांत वेतन बिल पर स्वयं के हस्ताक्षर कर विभाग को गुमराह करते हुए वेतन आहरित कर खाते में जमा हो गया और बाद में मामला प्रकाश में आने पर प्राचार्य ने विभाग में मेडिकल प्रस्तुत कर दिया। इस मामले में संभागीय उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग इंदौर द्वारा कारण बताओ सूचना पञ जारी कर जवाब मांगा गया है।
संस्था के शिक्षक व शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों ने जिला कलेक्टर को शिकायत मानसिक रूप से प्रताड़ित करने व आर्थिक अनियमितता एवं भृष्ट आचरण की शिकायत की थी जिसकी जांच डिप्टी कलेक्टर के द्वारा की गई है।
प्राचार्य के द्वारा की गई आर्थिक अनियमितता
प्राचार्य द्वारा तार फैसिंग के नाम पर संस्था के बच्चों से शिक्षकों के माध्यम से राशि वसूली गई है। जबकि राज्य शासन द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा निशुल्क दी जा रही है। विभाग द्वारा संस्था को पंखे, कम्प्यूटर, खेलकूद की सामग्री, सीएफएल, पानी की टंकी आदि दी गई है जो प्राचार्य ने कम्प्यूटर व पंखे, पानी की टंकी दान कर दी और कुछ निजी उपयोग में ले ली गई है। अवकाश स्वीकृति के नाम पर पैसे की मांग करना। संस्था के बच्चों की अंकसूची में ञुटि होने पर सुधार के नाम पर भोपाल आने जाने के व्यय की मांग करना।
