धमतरी। सरकार छात्र-छात्राओं के बेहतर भविष्य के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है। इसके बावजूद होनहार छात्र झोपड़ी में रहकर स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई-लिखाई करने मजबूर हैं। बमुश्किल दो वक्त का खाना मिल पाता है। कई बार तो रात में भूखा सोना पड़ता है। ग्राम पंचायत डोमा में निवासरत शत्रुघन सोनवानी और उसके चार बच्चे की यही दास्तान है, जो शासन-प्रशासन की योजनाओं को मुंह चिढ़ाती नजर आती है।
जिला मुख्यालय धमतरी से 12 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत डोमा है। यह ग्राम धमतरी जिले का प्रथम ओडीएफ गांव है। साफ-सफाई के नाम से पुरस्कृत इस ग्राम पंचायत में दिहाड़ी मजदूर शत्रुघन साहू और उनके चार बच्चे चंदन (14), करन (12), (अर्जुन) व बेदम (आठ) एक छोटी सी झोपड़ी में रहते हैं।
शत्रुघन ने बताया कि डोमा ससुराल गांव है। गांव में बसने की चाहत के चलते यहीं आकर बस गया। पत्नी के छोड़कर चले जाने के बाद उसके ऊपर ही बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक रूप से कमजोर शत्रुघन का परिवार पहले एक खंडहरनुमा घर में रहता था।
इसके बाद समाजिक भवन में रहते थे। उसके बाद गांव में बने पंप हाऊस को आशियाना बनाया। ग्राम पंचायत द्वारा यहां से निकालने के बाद छोटे सी झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। इस झोपड़ी में भी चैन से रहना मुश्किल है। गाय, बैल, कुत्ते, सांप, बिच्छू घुस जाते हैं। आवास की सुविधा न होने के कारण खतरा मोल लेकर यहां चार बच्चों के साथ रहने मजबूर हैं।
रात में मुश्किल से पढ़ते हैं
चंदन, करन, अर्जुन ने बताया कि दिन के समय तो किसी तरह पढ़ाई हो जाती है, पर दिन ढलते ही पढ़ाई के लिए परेशान होना पड़ता है। रात का अंधेरा भारी पड़ता है। झोपड़ी के सामने लगे स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करते हैं। चंदन कक्षा आठवीं, जुड़वा भाई करन, अर्जुन कक्षा छठवीं और बेदम कक्षा तीसरी में पढ़ते हैं। कभी-कभी तो भोजन भी नसीब नहीं हो पाता। तब भूखे पेट सोना पड़ता है। चारों बच्चे गांव के शासकीय स्कूल में अध्ययनरत हैं।
क्या कर सकते हैं
नाम न छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों ने कहा कि शत्रुघन के परिवार की स्थिति की जानकारी है, पर क्या कर सकते हैं। व्यक्तिगत तौर पर कभी-कभार यथासंभव सहायता कर देते हैं। ग्राम पंचायत को शासन के नियमों से परे जाकर मानवता के दृष्टिकोण से काम लेना चाहिए।
व्यक्तिगत रूप से करते हैं सहायता
ग्राम पंचायत डोमा के सरंपच मोतीलाल नागरची ने बताया कि शत्रुघन सोनवानी और उनके परिवार को व्यक्तिगत तौर पर हर संभव सहायता दी जाती है। पीएम आवास देने में दिक्कत है, क्योंकि वह मूल निवासी धमतरी शहर का है। यहां आकर बस गया है। उसे शहर में अटल आवास भी मिला हुआ है। राशनकार्ड भी शहर का है। दस्तावेज न होने के कारण शासन की कई अन्य सुविधाएं नहीं दी जा रही।
बेहतर भविष्य के लिए कर रहे प्रयास
माध्यमिक स्कूल के प्रधानपाठक आरके नेताम ने बताया कि आठवीं कक्षा का छात्र चंदन व उसके दोनों भाई प्रतिभावान है। होनहार छात्रों की पारिवारिक स्थिति को देखते हुए स्कूल स्टाफ की ओर से शिक्षण सामग्री प्रदान करने के साथ -साथ आर्थिक रूप से सहायता देने का प्रयास किया जाता है। इनके बेहतर भविष्य के लिए विकासखंड कार्यालय को सूचना दी गई है।
शहर से दस्तावेज ट्रांसफर करवाकर मदद दिलाएंगे
किसी भी शासकीय योजना का लाभ लेने के लिए दस्तावेज का होना बहुत जरूरी है। इसके बिना लाभ नहीं दिलाया जा सकता। संबंधित व्यक्ति का जो भी डाक्यूमेंट शहर में है, उसे गांव में ट्रांसफर कराकर हरसंभव मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि बच्चों का भविष्य बेहतर हो सके। – सीआर प्रसन्ना, कलेक्टर धमतरी
