उपचुनाव : 28 में से 22 विधानसभा सीटों की ग्राउंड रिपोर्ट से संघ-भाजपा की नींद उड़ी
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कार्यकर्ताओं को स्वीकार्य नहीं हो पा रहे आयातित भाजपा प्रत्याशी
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डैमेज कंट्रोल के लिए अब संघ ने सभी 22 सीटों की कमान अपने हाथों में ली
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-महेश दीक्षित
भोपाल। अब जबकि प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए सिर्फ बीस दिन बचे हैं, इनमें से 22 सीटों की जो ग्राउंड रिपोर्ट मिली है, उसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा संगठन की बेचैनी बढ़ाने के साथ उनकी नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार जिन 22 सीटों पर श्रीमंत ज्योतिरादित्य समर्थक नेता बतौर भाजपा प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, उन पर चुनावी हवा अभी भी भाजपा के कतई अनुकूल नहीं हैं। अब तक भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को आयातित भाजपा प्रत्याशी स्वीकार्य नहीं हो पा रहे हैं। कार्यकर्ता और नेता प्रचार के लिए घर से बाहर निकलने में परहेज कर रहे हैं। इस नेगेटिव रिपोर्ट के बाद इन 22 विधानसभा सीटों पर 3 नवंबर यानी मतदान होने तक संघ ने बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक आंतरिक मैनेजमेंट जिम्मा अब अपने हाथों में लिया है।
संघ को इन 22 विधानसभा सीटों की जो ग्राउंड रिपोर्ट मिली हैं, उनके अनुसार इन विधानसभा क्षेत्रों में न अभी भाजपा कार्यकर्ता और नेताओं का असंतोष खत्म हुआ है और भितरघात का खतरा टला है। भाजपा संगठन के प्रयास असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने में और इन श्रीमंत समर्थक प्रत्याशियों के प्रचार के लिए घर से निकालने में विफल रहे हैं। स्थिति यह है कि श्रीमंत सिंधिया समर्थक प्रत्याशी पार्टी के बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक के स्थानीय भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर पा रहे हैं। औपचारिकता निभाने के लिए भाजपा नेता हर कार्यक्रम में दिख तो रहे हैं, लेकिन प्रत्याशियों के समर्थन में जिस जज्बे और जी-जान से जुटने की जरूरत है, वह उत्साह कार्यकर्ताओं में कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। यद्यपि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मंडल और बूथ स्तर तक सम्मेलनों के जरिए प्रबंधन की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा में हारे भाजपा नेता आफ द रिकार्ड कहते हैं कि, संगठन का दवाब है, सो पार्टी के लिए काम करना मजबूरी है। लेकिन इन आयातित प्रत्याशियों को जिताकर क्या हमें राजनीतिक खत्म करना है।
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इन नेताओं पर संघ की नजर
यही वजह है कि अब खुद संघ ने असंतुष्ट नेताओं-कार्यकर्ताओं से समन्वय बनाने के साथ ही बूथ तक अधिक से अधिक मतदाताओं पहुंचाने की जिम्मेदारी अपने हाथों मेंं ली है। इसके साथ संघ ने भाजपा के टिकट पर वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव लडऩे और हारने वालों पर अपने तरह से नजर रखना शुरू किया है। क्योंकि संघ को यह पता है कि ज्यादातर उम्मीदवार और उनके समर्थक पिछली हार की टीस भूल नहीं पाए हैं। रिपोर्ट है कि ये असंतुष्ट श्रीमंत सिंधिया समर्थक भाजपा प्रत्याशियों को मतदान के दौरान डैमेज कर सकते हैं।
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हर मोर्चे पर प्रयास, पर सफलता नहीं
हालांकि भाजपा प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए हर मोर्चे पर काम कर रही है। इसमें असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं की मान-मनौव्वल के साथ मोदी-शिवराज सरकार की उपलब्धियां बताने और कमल नाथ सरकार की नाकामियां गिनाने के लिए हर स्तर पर पूरा समन्वय करना शामिल है। लगातार फीडबैक प्राप्त करने के साथ ही असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का प्रबोधन-संबोधन भी किया जा रहा है। लेकिन ये प्रयास अब तक असंतोष दूर करने में नाकाफी साबित हुए हैं।
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बहुमत के लिहाज से अहम है उप-चुनाव
राज्य की सियासत के लिहाज से 28 क्षेत्रों में होने वाले विधानसभा उपचुनाव काफी अहम हैं, क्योंकि राज्य विधानसभा की सदस्य संख्या 230 है। विधानसभा में पूर्ण बहुमत के लिए 116 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। वर्तमान में भाजपा के पास 107, कांग्रेस के 89, चार निर्दलीय, दो बसपा और सपा के एक विधायक हैं। भाजपा को पूर्ण बहुमत पाने के लिए कम से कम नौ सीटों पर जीत चाहिए।
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कौन सिंधिया समर्थक कहां से प्रत्याशी
सुमावली से एदल सिंह कंसाना, ग्वालियर पूर्व से मुन्नालाल गोयल, पोहरी से सुरेश धाकड़, मुंगावली से बृजेंद्र सिंह यादव, सुरखी से गोविंद सिंह राजपूत, बदनावर से राजवर्धन सिंह, सुवासरा से हरदीप सिंह डंग, दिमनी से गिर्राज दंडोतिया, अंबाह से कमलेश जाटव, गोहद से रणवीर जाटव, ग्वालियर से प्रद्युमन सिंह तोमर, डबरा से इमरती देवी, भांडेर से रक्षा संतराम सिरोनिया, करैरा से जसमन्त जाटव, बमौरी से महेंद्र सिंह सिसोदिया, अशोकनगर से जसपाल जज्जी, अनूपपुर से बिसाहूलाल सिंह. सांची से प्रभु राम चौधरी, हाटपिपलिया से मनोज चौधरी, सांवेर से तुलसी सिलावट, मुरैना से रघुराज सिंह कंसाना और मेहगांव ओपीएस भदौरिया भाजपा प्रत्याशी हैं।
