@सैयद ख़ालिद कैस -8770806210
भोपाल। कल प्रदेश भर के अधिवक्ताओ के न्यायालयीन कार्यों से विरत रहकर प्रतिवाद दिवस मनाया और अदालती कार्यों का बहिष्कार किया । स्टेट बार कौंसिल मध्यप्रदेश के आहवान पर हुई यह हड़ताल कम राजनैतिक रोटियां सेकने का काम था । मुख्यमन्त्री कमलनाथ स्वयं घोषणा कर चुके थे कि 20 जुलाई को अधिवक्ताओं से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट सम्बन्धी चर्चा करेंगे । परंतु स्टेट बार कौंसिल मध्यप्रदेश के भाजपा मानसिकता के मठाधीश चाहते थे कि प्रतिवाद दिवस की आड़ में कॉंग्रेस की कमलनाथ सरकार को बदनाम कर यह प्रचारित करें कि कमलनाथ सरकार अधिवक्ता विरोधी है । अपनी राजनैतिक रोटियां सैकने के लिए प्रदेश भर के अधिवक्ताओं को बरगलाया ।
ज्ञात हो कि निकट भविष्य में स्टेट बार कौंसिल मध्यप्रदेश के चुनाव हैँ । और पिछ्ले 15साल के घटनाक्रम देखें जाए तो शिवराज सिंह चौहान ने जिस तरह स्टेट बार कौंसिल मध्यप्रदेश में हस्तक्षेप कर अपने अपनों को जोड़तोड़ लगाकर एडजस्ट किया वह जगजाहिर है । स्टेट बार कौंसिल मध्यप्रदेश के इतिहास में कभी ऐसी घटनाऐं उजागर हुई हुई जितनी भाजपा शासन में हुई । कई बार अध्यक्ष बदले गए , कई बार अविश्वास प्रस्ताव आए , कई बार अध्यक्ष हटाये गए । ख़ैर टिका वही जो भाजपा की राह पर चला और अन्य को महज इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह भाजपा के नही थे । पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा को ऎसे वक्त में हटाया गया जब वह अपने पुत्र के असामयिक निधन की पीड़ा से गुज़र रहे थे , उनके ही समर्थन से शिवेन्द्र उपाध्याय अध्यक्ष बनें , परन्तु सत्ता के साथ होने की चाह ने उनको शिवराज सिंह भक्त बना दिया । ख़ैर !
कल का प्रतिवाद दिवस किसी भी हालत में अधिवक्ताओं के लिए नही था , क्योंकि कमलनाथ सरकार स्पष्ट कर चुकी थी कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट बनने जा रहा है । परन्तु राजनीति खेली गई और शिकार हुऐ अधिवक्ता । जो भेड़ चाल चलते हैँ बिना यह जाने कि यह प्रतिवाद दिवस उनके लिए कितना हितकारी है ।
भोपाल में हाई कोर्ट खंडपीठ स्थापना के नाम पर विरोध करने वाले तथाकथित अपनी आवश्यकताओ के लिए हर कभी प्रदेश के वकीलों को प्रतिवाद दिवस के नाम पर उपयोग कर अदालती कार्यो से अलग करके सरकार पर अपना दबाव दिखा देते हैँ , परन्तु भोपाल के वकीलों के हित कों देखते हुऐ हाई कोर्ट खंडपीठ के नाम पर हाथ खींच लेते हैँ तब प्रदेश भर में कोई आंदोलन नही होता , तब प्रतिवाद दिवस नही मानता , तब न्यायालयीन कार्यो से विरत नही रहते क्योंकि वह लोग नही चाह्ते कि भोपाल में हाई कोर्ट खंडपीठ स्थापित हो । और भोपाल के वकील उनके आहवान पर कूद जाते हैँ हर बार , बार -बार । यह नही समझते कि इससे उनको हासिल हुआ ।
अब यह जानना बेहद जरूरी है कि क्या कहा कॉंग्रेस ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट के लिए –
कांग्रेस की ओर से जारी बयान के अनुसार मध्यप्रदेश कांग्रेस सरकार की मान्यता है कि समाज का जो वर्ग कानून की रक्षार्थ अपना जीवन समर्पित करता है उसकी रक्षा का दायित्व सरकार का होना चाहिए। अतः मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार अधिवक्ताओं द्वारा अपने दायित्वों के निर्भयता एवं स्वतंत्रतापूर्वक निर्वहन हेतु अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम 2019 का एक प्रारूप तैयार किया है, जो शीघ्र ही मंत्री परिषद के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जावेगा। प्रस्तावित विधेयक में अधिवक्ताओं को उनके कर्तव्य के निर्वहन करने से रोकने या उसमें बाधा पहुंचाने के लिए उन पर हमला करने, चैट पहुंचाने, धमकी देने इत्यादि को प्रतिबंधित करते हुए दंडित किए जाने के संबंध में प्रचलित कानूनों से अधिक कड़े कानून प्रस्तावित किए गए हैं।
ज्ञातव्य है कि विगत भाजपा सरकार में 12 अगस्त 2012 को घोषणावीर से ख्यात तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अपने निवास पर एक बहुत बड़ी वकील पंचायत की थी जिसमें राज्य बार काॅसिंल के पदाधिकारी, उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, महाधिवक्ता कार्यालय, अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय, इंदौर एवं ग्वालियर के सभी विधि अधिकारी, जिला एवं तहसील स्तरीय सभी अभिभाषक संघों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सभी जिले के शासकीय अधिवक्ताओं, अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ताओं एवं विशेष लोक अभियोजकों को आमंत्रित किया गया था जिसमें यह घोषणा की गई थी कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एक कानून लाया जाएगा।
