नई दिल्ली: त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत के बाद प्रदेश में हिंसा का माहौल व्याप्त हो गया है। कई जगहों से तोड़फोड़ और मारपीट की खबरें आ रही हैं। यह भी खबर आई है कि बीजेपी समर्थकों ने एक बुलडोजर की मदद से दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया शहर में सोमवार को लेफ्ट के अगुवा माने जाने वाले रूसी कम्युनिस्ट नेता लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया। उसके बाद बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, लेनिन एक आतंकवादी था। लेनिन तो विदेशी है, एक प्रकार से आतंकवादी है। ऐसे व्यक्ति का हमारे देश में मूर्ति? उस मूर्ति को कम्युनिस्ट पार्टी के हेडक्वार्टर के अंदर रख रकते हैं और पूजा करें।

त्रिपुरा में 25 साल से सत्ता में काबिज रही लेफ्ट पार्टी को उखाड़ फेंकते हुए भाजपा-आईपीएफटी ने 18 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव के शनिवार को आए नतीजों में 59 में से 43 सीटों पर कब्जा जमाया है। प्रदेश के 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 35 सीटों पर जीत दर्ज की है वहीं आईपीएफटी की झोली में आठ सीटें आई हैं।
उधर, त्रिपुरा में छिटपुट हिंसा की खबरों के बीच गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राज्य के राज्यपाल और डीजीपी से बात की और नई सरकार के कामकाज संभालने तक राज्य में शांति सुनिश्चित करने को कहा। एक अधिकारी ने बताया कि टेलीफोन पर हुई बातचीत में राज्यपाल तथागत राय और डीजीपी एके शुक्ला ने त्रिपुरा की स्थिति और यहां विधानसभा चुनाव में भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन की जीत के बाद भड़की हिंसा पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों से केन्द्रीय गृह मंत्री को अवगत कराया। गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सिंह ने राज्यपाल और डीजीपी से हर तरह की हिंसा पर रोक लगाने और त्रिपुरा में नई सरकार के गठन तक शांति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। शनिवार को चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों में प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक समूहों के बीच छिटपुट हिंसा और संघर्ष की खबरें सामने आई थी।
कौन हैं लेनिन
रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन ने रूस के साम्यवादी विचारधारा को स्थापित किया। इस क्रांति के दौरान लेनिन को कई बार जेल भेजा भी जाना पड़ा और निर्वासित जीवन भी जीना पड़ा। उन्होंने 1898 में बोल्शेविक पार्टी की स्थापना की थी। 1905 की क्रांति के उनके प्रयास असफल रहे लेकिन 1917 में उन्होंने रूस के पुननिर्माण योजना बनाई और सफल हुए। उन्होंने केरेन्सकी की सरकार पलट दी और 7 नवंबर, 1917 को लेनिन की अध्यक्षता में सोवियत सरकार बनी। लेनिन की कम्युनिस्ट सिद्धांत और कार्यनीति लेनिनवाद के नाम से जानी जाती है। लेफ्ट विचारधारा और कार्यशैली में इनके विचारों का अहम योगदान है।
