पत्रकारों के साथ कुठाराघात करती शिवराज सरकार
सुरक्षा तो दूर मुंह से निवाला छीनने पर आमादा
भोपाल। कोरोना संक्रमण में सभी वर्गों की भांति मध्यप्रदेश का पत्रकार भी आर्थिक रूप से टूट गया है।कमलनाथ सरकार की विज्ञापन नीति की खामियों के शिकार लघु एवं छोटे पत्र पत्रिकाओं पर हुए वज्रपात की पूर्ति शिवराज सरकार ने कर दी।पहले तो पूर्व के विज्ञापनों की राशि रोककर दुसरा परम्परागत रूप से जनसम्पर्क से मिलने वाले विज्ञापनों में कठौती करके। लिहाजा पिछले 2 वर्षों से परेशान पत्रकार 15 अगस्त के बाद अब 26 जनवरी के विज्ञापन से भी वंचित हो गए है। वर्षो से अपने लिए सुरक्षा एवं कल्याण की मांग करने वाले पत्रकारों पर अब फिर शिवराज सरकार का एक और हमला हुआ है।
प्राप्त जानकारी अनुसार शिवराज सरकार ने जनसम्पर्क से जारी होने वाले विज्ञापन में पहले की कटौती को खत्म करते हुये सीधे तौर पर प्राइवेटेशन को बढ़ावा देते हुए विज्ञापन शाखा को प्राईवेट सेक्टर को सौंपने की तैयारी कर ली है।
मालुम हो कि शिवराज सरकार ने जनसंपर्क विभाग के विज्ञापन शाखा को प्राईवेट सेक्टर को देने की योजना केबिनेट में पास कर ली है और पत्रकारो पर भी खुफिया एजेंसी एवं पुलिस प्रशासन की सख्ती की योजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि 20 फरवरी को जनसंपर्क विभाग द्वारा प्राइवेट एजेंसी को विज्ञापन एजेंसी दी जाएगी जिससे मध्य प्रदेश के दैनिक छोटे-बड़े लघु समाचार पत्र पर भारी बोझ पड़ने वाला है जिससे वे परेशान होंगे और विज्ञापन बड़े मीडिया समूह को ही दिया जायेगा । जिससे छोटे मझोले लघु पत्र पत्रिकाओं के स्वामी ,संपादक परेशान होंगे। सीधे तौर पर यदि यह कहा जाए कि शिवराज सरकार सोची समझी साजिश के तहत कारपोरेट जगत को लाभ पहुंचाते हुये मध्यम वर्ग के पत्रकारों के साथ कुठाराघात कर रही है जिसके कारण प्रदेश भर के हज़ारो पत्रकारों के समक्ष आर्थिक संकट उतपन्न हो जाएगा।
प्रेस क्लब ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने शिवराज सरकार की इस विज्ञापन नीति की तीखी आलोचना करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
