पत्रकार दानिश सिद्दीकी के मौत पर प्रधानमंत्री की चुप्पी बहुत कुछ कहती है।
भारत के एक पत्रकार की हत्या होती है, जो कल का दिन था । आज सबको पता चलता उनके चाहने वाले और पत्रकार साथी श्रंद्धाजलि अर्पित कर रहे हैं। और आपको याद होगा लगभग एक महीने पहले एक और पत्रकार की मौत हुई थी। जो कि नेशनल मीडिया का एंकर था। और जो कहा गया कि मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ। मैं किसी के मौत को जस्टिफाई नहीं कर रहा हूँ। मैं बस दोहरा रवैया को आपके सामने रख रहा हूँ।
कल जो पत्रकार की हत्या हुई पुलित्ज़र पुरुस्कार से सम्मानित पत्रकार था वो दानिश सिद्दीकी, और ये हत्या अपने देश में नहीं बल्कि हजारों किलोमीटर दूर अफगानिस्तान के कंधार इलाके में हुआ। दानिश मौत को आगे कर अपने कर्म को निभता गया। लेकिन उसके ही मुल्क भारत में कुछ लोग उसके हत्या पर खुशी मना रहे हैं। और तो और भारत के टीवी चैनलों में उनके हत्या की खबरें गायब है। बस खानापूर्ति के लिए खबरें दिखाई गई । लेकिन आप फिर से वही उस एंकर के मौत के दिन को याद कीजिए प्रधानमंत्री से लेकर कई मंत्री ट्वीट कर शोक जताया मैं कोई सवाल नहीं खड़ा कर रहा हूँ। लेकिन आज कहाँ है प्रधानमंत्री के ट्वीट कहाँ है किसी मंत्री का शोक संदेश नहीं बिल्कुल नहीं है।
क्योंकि इन्होंने अपना पक्ष चुन लिया है वो है इनका पक्ष जो इनके इतर जाएगा या इनसे सवाल करेगा उससे इसी तरह का व्यवहार किया जाएगा बल्कि आज पत्रकार के परिवार को सांत्वना देने का दिन होना चाहिए था। उनके परिवार को संबल देने का दिन है। देश के प्रधानमंत्री से इस तरह की उम्मीद तो बिल्कुल नहीं किया जा सकता । आपके नजर में सब एक होना चाहिए था।
दानिश सिद्दीकी की हत्या किसी दूसरे मुल्क में हुई , कैसे हुई आपका अपने स्तर से देखना चाहिए था। एक गर्व वाली बात है कि किसी दूसरे मुल्क में अपने देश का व्यकि अपना कर्म करते हुए शहीद हुआ। दूसरे मुल्क के लोग दुखी हो रहे हैं श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। किस बात का दोहरा मापदंड ?
फर्क तो दिखता है साहेब। आप जितना भी सबका साथ सबका विकास का नारा दे दें। रोहित सरदाना ड्यूटी पर नहीं मरे थे। फिर भी आप और आपके गुर्गों ने श्रद्धांजलि देने की होड़ मचा रखी थी। ऐसा लग रहा था जैसे देश का सिपाही चला गया।
लेकिन अब जब अपने देश का जांबाज़ और सच्चा सिपाही शहीद हुआ अपनी line of duty पर। आपका एक संदेश नहीं है। ‘गद्दारों को गोली मारने’ वाले I&B minister अनुराग ठाकुर ने एक ट्वीट करके औपचारिकता पूरी कर दी है।
तरीके से तो आपको दानिश के परिवार को साहस देना चाहिए था और उनका पार्थिव शरीर लाने के लिए सरकारी व्यवस्था करनी चाहिए थी। लेकिन छोड़िए आपसे उम्मीद ही क्या रखनी। आज तक कौन सी उम्मीद पूरी की है आपने।
बहरहाल, इस भेदभाव वाले रवैया के बाद आपके चेले चपाटे किस मुंह से मुसलमानों को देशद्रोही कहते हैं। जब देश की सरकार ही उनको अपना नहीं मानती तो किस मुंह से उनसे आप देशभक्ति की उम्मीद करते हैं?
वैसे आपके इस तरह के रवय्ये के बाद भी मुसलमानों ने देशभक्ति दिखाई है। वो काबिल ए तारीफ है।
अलविदा सर अब वो दिल को चिर देने तस्वीर नहीं देख पाऊंगा, शायद ही कोई आपके तरह तस्वीरों को जिंदा कैद कर पाएगा 😢
@सैयद रिज़वान अली बाँकानेर
